‘टाइगर जिंदा है’ से आरसीपी सिंह ने दिखाया जलवा

 नीतीश कुमार की बढ़ेंगी मुश्किलें?,  बिहार में मिशन शुरू

दीपक कुमार तिवारी

पटना। आगामी बिहार विधान सभा चुनाव 2025 को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं। वर्ष 2020 की ‘जंग’ में चुनावी परेशानी में डालने वाले लोजपा (आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान भले उनके करीबी हो गए हैं, लेकिन वर्ष 2025 के चुनाव के लिए उनके राजनीतिक दुश्मन ने ताल ठोंक कर नई चुनौती दे डाली। नीतीश के ये राजनीतिक दुश्मन हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.सी.पी. सिंह, जिन्होंने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करके सबको चौंका दिया है। सबसे बड़ी परेशानी तो यह है कि आर.सी.पी. सिंह न केवल जनता दल यू के रणनीतिकार और संगठनकर्ता रहे हैं, साथ ही बिहार में जातीय राजनीति में प्रभावी जाति कुर्मी से भी आते हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.सी.पी. सिंह ने अपनी दहाड़ से राजनीतिक जगत को चौंका दिया। जाहिर है, यह चर्चा भी तेज थी कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा अधूरी ही रह गई है। मगर इसकी पूर्ति के लिए पहले होम वर्क करेंगे। इनमें पहले चरण में करीबियों की सलाह लेंगे और फिर जनता के बीच जाएंगे।
पहले चरण में आर.सी.पी. सिंह ने अपने लोगों से संपर्क किया। फिर गहरे मंथन के बाद इस महीने तीन दिवसीय बैठक में पार्टी बना कर चुनावी जंग में शामिल होने पर मुहर लगा दी। हालांकि इन पोस्टरों के साथ एक सवाल यह भी राजनीतिक गलियारों में गूंजने लगा है कि आखिर टाइगर जिंदा क्यों है? क्या कोई मिशन अधूरा रह गया?
वैसे तो नीतीश कुमार की नाराजगी आर.सी.पी. सिंह की लेकर तभी से बढ़ गई थी, जब वे मोदी सरकार में मंत्री बन गए थे। लेकिन, उसका प्रकटीकरण तब हुआ, जब जदयू नेतृत्व ने आर.सी.पी. सिंह को पुनः राज्यसभा भेजने को लेकर हरी झंड़ी नहीं दिखाई। नाराज आर.सी.पी. सिंह ने अंततः जदयू से नाता तोड़ लिया और फिर कुछ दिन आत्ममंथन किया और फिर 11 मई 2023 को बीजेपी में शामिल हो गए थे। लेकिन, बीजेपी ने उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी। काफी इंतजार भी किया।
राजनीतिक गलियारों की बात करें तो आधिकारिक हनक रखने वाले आर.सी.पी. सिंह इस उपेक्षा को सह नहीं सके। हालांकि वे स्वयं कहते हैं कि बीजेपी में हमारी उपेक्षा नहीं हो रही है। भाजपा के शीर्ष नेता से अभी भी संबंध काफी अच्छे हैं। आरसीपी सिंह को 14 साल का सांगठनिक अनुभव है।
मिली जानकारी के अनुसार, कितनी सीटों पर और कहां से लड़ेंगे, आरसीपी सिंह यह बिहार भ्रमण के बाद तय करेंगे। पर पिछले दिनों अपने आवास पर तीन दिवसीय बैठक में चुनाव लड़ने के इच्छुक 138 उम्मीदवारों से बातचीत की गई। उन्हें पहले अपने क्षेत्र में पंचायत स्तर तक संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी दी गई है। चुनाव से पहले वे राज्य के 243 विधान सभा सीटों का अध्ययन करेंगे और फिर उम्मीदवारी तय करेंगे।
जेडीयू सांसद कौशलेंद्र ने आर.सी.पी. सिंह के पार्टी खड़ा करने पर प्रतिक्रिया देते कहा कि पार्टी बनाने का अधिकार सभी को है। पर आरसीपी सिंह कभी भी नीतीश कुमार नहीं बन सकते हैं। मुख्यमंत्री ने संघर्ष का रास्ता चुना और इन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारी से राजनेता बनाया। आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें पता चल जाएगा कि बिहार में इनकी कितनी पहुंच है।

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