कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का बड़ा झटका लगा है। विधायकों की बगावत और 20 सांसदों के टूटने के बाद साथ खड़े मदन मित्रा भी अब ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं। बुधवार को मदन मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए ऋतब्रत बनर्जी के साथ जाने का ऐलान किया। मदन मित्रा ने यह निर्णय ईडी से समन मिलने के बाद लिया है। एक दिन पहले ईडी ने मदन मित्रा के दो बेटों और पत्नी को म्युनिसिपल भर्ती घोटाले के संबंध में समन भेजा था।
कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं मित्रा
वर्तमान में उत्तर 24 परगना जिले की कमरहटी विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे लंबे समय तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव रहे हैं। मित्रा पश्चिम बंगाल सरकार में खेल और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। ममता बनर्जी को यह झटका ऐसे वक्त पर लगा है जब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। पार्टी में बगावत के बाद मदन मित्रा ही कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर लगातार देख जा रहे थे। वह अहम बैठकों में भी भाग ले रहे थे।
कांग्रेस के की थी शुरुआत
मदन मित्रा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस की छात्र शाखा से की थी। साल 1998 में जब ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, तब मदन मित्रा उनके साथ आ गए। वह पहली बार 2011 में विधायक चुने गए थे और हाल ही में मई 2026 में हुए चुनावों में दोबारा कमरहटी निर्वाचन क्षेत्र से अपनी जीत दर्ज की। ममता बनर्जी ने वरिष्ठ नेता मदन मित्रा को तृणमूल कांग्रेस का जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) और पश्चिम बंगाल विधानसभा में चीफ व्हिप नियुक्त किया था। इसके अलावा उन्हें दम दम-बारानगर संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष और हॉकर संगठन की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।






