रायबरेली में राहुल गांधी का दौरा: बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार विरोध

10 सितंबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली के सांसद राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उनका यह दौरा पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और स्थानीय कार्यक्रमों पर केंद्रित था, लेकिन पहुंचते ही उन्हें बीजेपी कार्यकर्ताओं का तीव्र विरोध झेलना पड़ा। योगी आदित्यनाथ सरकार के उद्यान राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने समर्थकों के साथ लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर धरना दिया और राहुल के काफिले को रोक लिया।

 

विरोध प्रदर्शन का विवरण

 

स्थान और तरीका: विरोध हरचंदपुर थाना क्षेत्र के बटोही होटल या गुलुपुर के पास हाईवे पर हुआ। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और सैकड़ों बीजेपी कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए, जिससे राहुल का काफिला करीब 1 किलोमीटर पहले ही रुक गया।
नारे और मांग: प्रदर्शनकारियों ने “राहुल गांधी वापस जाओ” के नारे लगाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल की कथित “अपमानजनक टिप्पणी” (खासकर बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान) पर नाराजगी जताई और राहुल से सार्वजनिक माफी की मांग की। दिनेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता को अपनी गलती माननी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, जिससे बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

यह घटना राहुल के दौरे के तुरंत बाद हुई, जब वे लखनऊ एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से रायबरेली आ रहे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल का स्वागत किया, लेकिन विरोध ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ

राहुल का दौरा: राहुल गांधी का यह दौरा 2027 यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने और कार्यकर्ताओं से जुड़ने के उद्देश्य से था। पहले दिन वे पार्टी पदाधिकारियों से मिले, गोरा बाजार चौराहे पर अशोक स्तंभ का लोकार्पण किया, और मनरेगा के तहत बने पार्क का निरीक्षण करने वाले थे। दूसरे दिन और कार्यक्रम निर्धारित हैं।
दिनेश प्रताप सिंह का रुख: दिनेश सिंह पहले कांग्रेस से जुड़े थे और राहुल-प्रियंका के करीबी माने जाते थे, लेकिन 2019 में बीजेपी में शामिल हो गए। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने रायबरेली से राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन करीब 4 लाख वोटों से हार गए। यह विरोध उनके पुराने संबंधों के बावजूद राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है।
राजनीतिक तनाव: विरोध पीएम मोदी पर राहुल के बयानों (जैसे “वोट चोर गद्दी छोड़”) से जुड़ा है, जिसे बीजेपी “अपमानजनक” बता रही है। इससे कांग्रेस-बीजेपी के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। कुछ पोस्टर्स में राहुल, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को “कलयुग के ब्रह्मा-विष्णु-महेश” बताया गया, जो विपक्षी एकता को हाइलाइट करता है।

यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण को दिखाती है, जहां स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस से जुड़ रहे हैं। राहुल का दौरा जारी है, लेकिन विरोध ने सुर्खियां बटोर लीं।2sHow can Grok help?

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