बिना किसी आंदोलन के ऐलान के किसान नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात करना नागरिकों की स्वतंत्रता और निजता में हस्तक्षेप: किसान संघर्ष मोर्चा
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध नगर में किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात किए जाने की किसान नेताओं ने कड़ी निंदा की है। किसान नेताओं का आरोप है कि जनपद में किसी वीआईपी के आगमन अथवा किसी अन्य स्थान पर आंदोलन की संभावना के नाम पर पुलिस द्वारा बार-बार किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद करने जैसी कार्रवाई की जाती है। इससे नागरिकों की स्वतंत्रता और निजता के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने बताया कि आज सुबह से ही उनके घर सहित सोरन प्रधान, सुखबीर खलीफा तथा किसान सभा, किसान परिषद और किसान एकता संघ से जुड़े नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात कर दी गई है। उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा की ओर से जंतर-मंतर अथवा जनपद में कहीं भी किसी प्रकार के आंदोलन का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके बावजूद पुलिस की इस कार्रवाई का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।
डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार प्राप्त हैं। बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के नागरिकों की आवाजाही और स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करते समय संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि किसान नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में असहमति और आंदोलन की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसान नेताओं के घरों पर इस प्रकार पुलिस तैनात करना नागरिकों के बुनियादी अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए मांग की कि इस तरह की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
किसान परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सचिन एडवोकेट ने कहा कि नागरिकों की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले को कानूनी तरीके से न्यायालय के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
किसान संघर्ष मोर्चा ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि किसान नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात करने की कार्रवाई का स्पष्ट आधार बताया जाए, इस प्रकार की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा लोकतांत्रिक विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए।





