आजादी के आंदोलन के अमर योद्धाओं डॉ लोहिया भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को जन संगठनों ने याद किया

रीवा । समाजवादी चिंतक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ राम मनोहर लोहिया की जयंती और अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के शहादत दिवस पर स्थानीय पूनम जनमासा नेहरूनगर में ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकार नाथ खरे जनशताब्दी वर्ष व्याख्यान माला अंतर्गत नारी चेतना मंच, समता सम्पर्क अभियान समाजवादी कार्यकर्ता समूह एवं विंध्यांचल जन आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में एक विचार संगोष्ठी संपन्न हुई।

अध्यक्षता अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त सहायक कुलसचिव दल प्रताप सिंह तिवारी ने की। संचालन डॉ श्रद्धा सिंह ने किया। कार्यक्रम में देश के स्वतंत्रता आंदोलन के लिए संघर्ष करने वाले वीर सपूतों को याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान जन गण मन सामूहिक रूप से गाया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डीपीएस तिवारी ने कहा कि 23 मार्च का दिन काफी महत्वपूर्ण है। 23 मार्च 1910 को डॉ लोहिया ने जन्म लिया था और 23 मार्च 1931 को भगत सिंह सुखदेव राजगुरु देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूले। भगत सिंह की शहादत के बाद डॉ लोहिया ने अपना जन्मदिन नहीं मनाया। आज लोहिया और भगत सिंह को वैचारिक आधार पर याद किया जा रहा है। श्री तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में दोहरे मापदंड की राजनीति चल रही। त्याग और बलिदान की पीढ़ी पर वंशवाद का कटाक्ष किया जा रहा वहीं दूसरी ओर सत्ता का भरपूर लाभ लेते हुए त्याग का ढोंग किया जा रहा है।

संगोष्ठी को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि भगत सिंह और डॉ लोहिया समाजवादी वैचारिक धरातल के महान चिंतक और क्रांतिकारी थे। भगत सिंह ने क्रांतिकारी आंदोलन को मजबूत किया। उनके द्वारा असेंबली में फेंके गए बम का उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं बल्कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ जोरदार धमाका करना था। राष्ट्रीय नेता लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के बाद भगत सिंह ने धमाकेदार सत्याग्रह करके ब्रिटिश हुकूमत को बड़ी चुनौती दी। डॉ लोहिया ने समाजवाद को समानता के आधार पर संपन्नता से जोड़ा। समाज की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को आगे लाने के लिए डॉ लोहिया ने विशेष अवसर के सिद्धांत की बात की। उन्होंने जाति व्यवस्था और विदेशी भाषा की गुलामी पर तीखा प्रहार किया। डॉ लोहिया और भगत सिंह पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के घोर विरोधी थे। उनके विचारों को मानने वाले लोगों को वर्तमान खतरे से सावधान होते हुए अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए।

लोकतंत्र सेनानी बृहस्पति सिंह ने कहा कि देश की आजादी के लिए भगत सिंह और डॉ लोहिया का महान योगदान था। इनकी क्रांतिकारी गतिविधियों से आजादी का आंदोलन मजबूत हुआ।

समाजसेवी श्रवण प्रसाद नामदेव ने डॉ लोहिया भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को याद करते हुए उनके विचारों को देश की खुशहाली के लिए काफी महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में बृहस्पति सिंह, अजय खरे, श्रवण प्रसाद नामदेव , डा प्रकाश तिवारी, डॉ श्रद्धा सिंह,ओमप्रकाश द्विवेदी, शेषमणि शुक्ला, अशोक सोनी,नारी चेतना मंच की नेत्री प्रेमवती शर्मा, गीता महंत, इतवरिया चंदेल, प्रेम नाथ जायसवाल, दीपक द्विवेदी, विवेक पाण्डेय की उपस्थिति रही।

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