देश के इतिहास में छात्र आंदोलनों ने हमेशा सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य किया है। जब-जब युवाओं ने अपने अधिकारों, शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए आवाज़ उठाई है, तब-तब देश को नई दिशा मिली है। छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। छात्रों पर लाठीचार्ज और दमनात्मक कार्रवाई सरकार की असहिष्णुता तथा आलोचना से घबराहट को दर्शाती है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध को सम्मान दिया जाना चाहिए, न कि उसे बल प्रयोग से दबाया जाना चाहिए।
सरकार को चाहिए कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुने, संवाद के माध्यम से समाधान निकाले और शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल करे। लोकतंत्र की मजबूती जनता की आवाज़ सुनने में है, उसे दबाने में नहीं।
देवेन्द्र गुर्जर
जिलाध्यक्ष
भारतीय सोशलिस्ट मंच गौतमबुद्धनगर





