बिना तैयारी जमीन सर्वे के मैदान में नीतीश सरकार?

 हो न जाए आंध्र-तेलंगाना वाला हाल!

 पटना। ऐसा लग रहा है कि बिहार में नीतीश सरकार का जमीन सर्वे अभियान लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। राज्य के लगभग पौने तीन करोड़ परिवारों में जमीन के कागजातों को लेकर खलबली मची हुई है। सर्वे में सरकारी तैयारी की कमी और अफसरशाही के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुप्पी साध रखी है। बिहार में लगभग 2.75 करोड़ परिवार रहते हैं। इनमें से ज्यादातर परिवारों के पास थोड़ी-बहुत जमीन है। नीतीश सरकार ने हाल ही में जमीन सर्वे शुरू किया है, मगर अब लग रहा है कि इसकी तैयारी पूरी नहीं थी। सर्वे के लिए जरूरी कर्मचारी और संसाधन नहीं हैं। लोग जमीन के पुराने कागजात ढूंढने में लगे हैं, मगर कैथी लिपि में होने की वजह से समझना भी मुश्किल हो रहा है। जमीन सर्वे के लिए कई लोग तो सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट-काट कर थक गए। रिश्वतखोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। भूमि सर्वेक्षण कर्मचारियों की कमी और कैथी लिपि को समझने वाले लोगों की गैरमौजूदगी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पुराने दस्तावेज किसी को समझ में ही नहीं आ रहा।
जमीन सर्वे पर विपक्षी नेताओं ने नीतीश सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी कोटे से भूमि राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने पहले तो सरकार एंग्री यंग मैन जैसा बयान दिया लेकिन बाद में चुप्पी साध ली। हालांकि, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोगों को आश्वासन दिया है कि जमीन सर्वे की कोई आखिरी तारीख नहीं है।
लेकिन जमीनी स्तर पर सरकार से किसान नाखुश हैं। लोग सरकार की तैयारी और अफसरों की मनमानी पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसा ही कुछ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी देखने को मिला था, जहां जल्दबाजी में किए गए जमीन सर्वे के कारण लोगों में नाराजगी फैल गई थी। जानकारों का मानना है कि के. चंद्रशेखर राव और जगन मोहन रेड्डी सरकारों को चुनाव में इसी वजह से हार का सामना करना पड़ा था।
बिहार में नीतीश सरकार भूमि सर्वेक्षण करवा रही है, लेकिन ये काम सरकार के लिए सिरदर्दी बनता जा रहा है। आम लोगों से लेकर कर्मचारी और अधिकारी तक, सभी को इस सर्वेक्षण में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्वेक्षण का काम बहुत धीरे चल रहा है और आए दिन किसी न किसी वजह से रुक रहा है। पहले तो कर्मचारियों की कमी थी और अब कर्मचारी होने के बाद भी उन्हें पुराने दस्तावेज पढ़ने में दिक्कत आ रही है।
बिहार में भूमि सर्वेक्षण का काम 2013 से चल रहा है। इसका उद्देश्य भूमि संबंधी विवादों को खत्म करना है। लेकिन इस काम में कई बाधाएं आ रही हैं। सबसे बड़ी बाधा है कैथी लिपि। पुराने जमीन के कागजात कैथी लिपि में लिखे गए थे और नए कर्मचारियों को ये लिपि पढ़नी नहीं आती है।
कैथी लिपि एक पुरानी लिपि है जिसका इस्तेमाल बिहार में 1980 से पहले सरकारी और निजी दस्तावेज़ों को लिखने के लिए होता था। मुगल और अंग्रेजों के समय में भी इसका खूब इस्तेमाल होता था। उस जमाने में जमीन के कागजात, जैसे- खातियान, रसीद, बंदोबस्त के कागज सब कैथी लिपि में ही लिखे जाते थे।
समय के साथ-साथ इस लिपि का चलन कम होता गया। अब बहुत कम लोग हैं जो कैथी लिपि पढ़ और लिख सकते हैं। यही वजह है कि नए कर्मचारियों को पुराने जमीन के दस्तावेज पढ़ने और समझने में बहुत दिक्कत हो रही है। इससे सर्वेक्षण का काम बहुत धीमा हो गया है।
कई जगहों पर जमीन मालिक 5-15 हजार रुपए से भी ज्यादा देकर कैथी लिपि में लिखे दस्तावेजों का अनुवाद कर रहा हैं। लेकिन ये अनुवाद कितना सही है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। गलत अनुवाद की वजह से जमीन विवाद और भी बढ़ सकते हैं।
इस समस्या को देखते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अब अमीन और कानूनगो को कैथी लिपि की ट्रेनिंग देने का फैसला किया है। ट्रेनिंग की शुरुआत बिहार के बेतिया जिले से हुई। 17 से 19 सितंबर तक बीएचयू के रिसर्च स्कॉलर प्रीतम कुमार और मोहम्मद वॉकर अहमद अमीन और कानूनगो को कैथी लिपि की ट्रेनिंग देंगे।
मगर, सवाल उठता है कि सरकार को 11 साल बाद ये समस्या क्यों दिखाई दी? क्या इतने सालों में विभाग के सामने ये समस्या कभी नहीं आई? अगर आई थी तो नई नियुक्तियों के समय इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखा गया? बिहार में भूमि सर्वेक्षण की शुरुआत साल 2013 में हुई थी। बिहार विशेष सर्वेक्षण बंदोबस्त नियमावली 2012 के तहत ही ये जमीन सर्वेक्षण किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जो भी नए अमीन बहाल किए गए हैं, उन्हें नापी करनी नहीं आती है। कैथी पढ़ना तो बहुत दूर की बात है। सरकार ने केवल सर्टिफिकेट के आधार पर उन्हें बहाल कर लिया है। उन्हें न तो लैंड लॉ की जानकारी है और न ही पब्लिक को कागज समझाने की समझ है। ऐसे में अगर अमीन ही कागज पढ़ने में सक्षम नहीं हैं तो ये विवाद को और बढ़ाएगा।
वैसे, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार कह चुके हैं कि भूमि विवाद खत्म करने के लिए ही यह सर्वेक्षण करवाया जा रहा है। लेकिन अगर सर्वेक्षण करने वाला ही पूरी तरह से तैयार नहीं होगा तो क्या यह विवाद खत्म हो पाएंगे? या फिर नए विवादों को जन्म देंगे? हालांकि, सर्वेक्षण के काम में तेजी लाने के लिए ज्यादा कर्मचारियों की मांग की गई। इसके बाद 2023 में 10 हजार पदों के लिए नियुक्तियां निकाली गईं। जुलाई 2023 में इन पदों पर नियुक्तियां हुईं।
साल 2019 में कानूनगो, अमीन और बंदोबस्त पदाधिकारी जैसे पदों के लिए 6350 नियुक्तियां निकाली गई थीं। 2021 में ये नियुक्तियां पूरी हुईं। सारे पद कॉन्ट्रैक्ट पर भरे गए थे। उसी समय 550 अमीनों की नियुक्ति अंचल में की गई थी। उनके पास अमानत और सर्वेयर में टेक्निकल डिग्री थी। लगभग चार साल काम करने के बाद सरकार ने इन कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया और कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया।
20 अगस्त से नए प्रखंडों और पंचायतों में सर्वेक्षण की जानकारी दी जा रही है। किसानों और जमीन मालिकों को अपने जमीन के कागजात ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा करने को कहा जा रहा है।
40-50 साल पहले बिहार के गांवों में जमीन की अदला-बदली आम बात थी। लोग आपस में जमीन की अदला-बदली कर लेते थे। लेकिन जमीन की रजिस्ट्री पहले की तरह ही रहती थी। कई पीढ़ियां सिर्फ बातचीत या पंचों द्वारा बनाए गए कागजों के आधार पर ही उस जमीन पर अपना हक मानती रही। भूमि सर्वेक्षण के समय यही बात लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।

  • Related Posts

    छाती दबाना और सलवार उतारना रेप नहीं! तो क्या है कानून में बलात्कार की परिभाषा?  
    • TN15TN15
    • July 16, 2026

    पटना हाईकोर्ट की एक हालिया कानूनी टिप्पणी ने…

    Continue reading
    बंटी यादव हत्याकांड: बिहार में आमरण अनशन पर बैठेंगे परिजन, आरोपियों को कड़ी सजा की करेंगे मांग
    • TN15TN15
    • July 16, 2026

    बिहार में पटना के करबिगहिया में बंटी यादव…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    संसद में पेश होने से पहले ही वंदे मातरम बिल पर छिड़ गई बहस, कांग्रेस ने बताया संविधान के खिलाफ

    • By TN15
    • July 17, 2026
    संसद में पेश होने से पहले ही वंदे मातरम बिल पर छिड़ गई बहस, कांग्रेस ने बताया संविधान के खिलाफ

    सोनम वांगचुक का नया वीडियो आया सामने- ‘मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, उसके बाद भूत बनकर…’

    • By TN15
    • July 17, 2026
    सोनम वांगचुक का नया वीडियो आया सामने- ‘मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, उसके बाद भूत बनकर…’

    सोनम वांगचुक के समर्थन में 19 जुलाई को रीवा कमिश्नरी के समक्ष आयोजित होगा धरना

    • By TN15
    • July 17, 2026
    सोनम वांगचुक के समर्थन में 19 जुलाई को रीवा कमिश्नरी के समक्ष आयोजित होगा धरना

    Explained: क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले बदल गई मानसून सत्र की तस्वीर?

    • By TN15
    • July 17, 2026
    Explained: क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले बदल गई मानसून सत्र की तस्वीर?

    सोनम वांगचुक के समर्थन में 19 जुलाई को रीवा कमिश्नरी के समक्ष आयोजित होगा धरना

    • By TN15
    • July 17, 2026
    सोनम वांगचुक के समर्थन में 19 जुलाई को रीवा कमिश्नरी के समक्ष आयोजित होगा धरना

    बदले जाएंगे 10 और 20 रुपए के नोट, आरबीआई ने कर दिया बड़ा ऐलान!

    • By TN15
    • July 17, 2026
    बदले जाएंगे 10 और 20 रुपए के नोट, आरबीआई ने कर दिया बड़ा ऐलान!