मराठी भाषा आंदोलन के दौरान, विशेष रूप से जुलाई में, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। यह घटना ठाणे जिले के मीरा भयंदर इलाके में एक रैली के दौरान हुई, जो मराठी न बोलने वाले एक फूड स्टॉल मालिक के साथ मारपीट के विरोध में आयोजित की गई थी। मनसे कार्यकर्ताओं ने बिना पुलिस अनुमति के मुंबई तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन ठाणे और पालघर के प्रमुख नेता अविनाश जाधव सहित अन्य नेताओं को सुबह-सुबह हिरासत में ले लिया गया, जिससे उनकी योजना विफल हो गई। मनसे के संदीप देशपांडे ने इसे “आपातकाल जैसी स्थिति” करार दिया और आरोप लगाया कि पुलिस गुजराती व्यापारियों के विरोध मार्च को अनुमति दे रही थी, जबकि मराठी लोगों के मार्च को रोक रही थी। इस घटना ने महाराष्ट्र में भाषा विवाद को और तीव्र कर दिया।








