झंझावातों से जूझना, टकराना उनकी नियति थी !

( भाग—6)

कर्पूरी ठाकुर हरावल दस्ते के सोशलिस्ट थे!

प्रोफेसर राजकुमार जैन

कर्पूरी जी विपक्ष और शासन दोनों में रहे। विपक्ष में ताउम्र, शासन में 3 साल से भी कम मुख्यमंत्री तथा 9 महीने उपमुख्यमंत्री पद पर रहे। कर्पूरी जी उन नेताओं में नहीं थे जो विपक्ष में रहते हुए एक बात तथा सत्ता में आते ही दूसरा रुख अपना लेते हैं। विधानसभा सचिवालय मैं
लिफ्ट के बाहर लिखा होता था कि यह केवल एमएलए, मंत्रियों तथा उच्च पदाधिकारी के प्रयोग के लिए है। कर्पूरी जी ने तत्काल आदेश देकर उसको सभी के लिए यानी के चतुर्थ क्लास के कर्मचारियों को भी लिफ्ट में जाने की इजाजत दे दी।
कर्पूरी जी अपना आदर्श डॉक्टर राम मनोहर लोहिया को मानते थेl शासन में आते ही उन्होंने डॉक्टर लोहिया की नीतिनुसार दो बड़े फैसले, शिक्षा में अंग्रेजी के अनिवार्यता की समाप्ति, तथा मुंगेरीलाल कमिशन के आरक्षण को लागू कर दिया। यह कोई साधारण निर्णय नहीं था। कर्पूरी जी ने लोहिया साहित्य का गहन अध्ययन कर रखा था। डॉ लोहिया ने जब इन सिद्धांतों का निरूपण किया,था। द्विज और भद्र समाज ने उन पर हमला बोल दिया। कर्पूरीजी ने यह सब जानते हुए, समाज में बुनियादी तब्दीली के लिए यह कदम उठा लिए। आरक्षण की नीति पर कर्पूरी जी ने डॉक्टर लोहिया के संबंध में लिखा था , कि लोहिया ने समाजवाद को जोड़ा जनतंत्र से, लोकशाही से। फिर उन्होंने समाजवाद को जोड़ा न केवल आर्थिक और राजनीतिक कार्यक्रमो से बल्कि समाजवाद को जोड़ा सामाजिक कार्यक्रमो से खास तौर से भारत जैसे देश के लिए उन्होंने कहा कि यह जो अदिवज है,यह जो हरिजन आदिवासी है पिछडे और औरतें जो है इनको विशेष अवसर देना पड़ेगा। मैं नहीं जानता के हिंदुस्तान के किसी राजनीतिक नेता ने, दक्षिण भारत के रामास्वामी नायकर को छोड़कर, पेरियार को छोड़कर और डॉक्टर अंबेडकर को छोड़कर हिंदुस्तान की किसी राष्ट्रीय पार्टी के नेता ने यह कहा है की हिंदुस्तान में जो अदिवज हैं, हिंदुस्तान में जो सामाजिक दृष्टि से शोषित है, पीड़ित है, दलित है, राजनीतिक शोषण नहीं है। आर्थिक शोषण ही शोषण नहीं है, सामाजिक शोषण भी शोषण है, तो जो सामाजिक दृष्टि से शोषित है राजनीतिक और आर्थिक शोषण के अतिरिक्त वह जो शोषण हैं इनको विशेष अवसर मिलना चाहिए। आरक्षण शब्द का इस्तेमाल उन्होने कहीं कहीं किया है। अंग्रेजी में इन्होंने शब्द इस्तेमाल किया है प्रेफेरिन्सीयल ट्रीटमेंट उनको मिलना चाहिये। मैं नहीं जानता कि किसी दूसरे नेता ने इतनी जोर से, इतने स्पष्ट ढंग से यह आवाज उठाई हो। डॉक्टर लोहिया ने यह आवाज उठाई तो उनको सनकी कहा गया।
1967 में उपमुख्यमंत्री तथा बतौर शिक्षा मंत्री के बिहार में मैट्रिक की परीक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म करने का फैसला कर दिया। उनके इस फैसले से भद्र समाज बौखला उठा। हालांकि फैसला पिछड़े-दलित गरीब तबको के पक्ष में बुनियीदी तब्दीली का था। कर्पूरी डिवीजन कहकर उनका मखौल उड़ाया गया।उन्होंने गरीब छात्रों के लिए निशुल्क शिक्षा का प्रबंध भी किय था। शराब बंदी जैसा कड़ा फैसला लेकर जहां उन्होंने गरीब तबको की जिंदगी में एक नई रोशनी लाने का काम किया था, परंतु बड़े-बड़े शराब माफियाओं राजनेताओं के गठजोड़ ने उस पर साजिश करके हमला बोला। भारतीय जनसंघ ने भी इसका कड़ा विरोध किया था।आखिरकार कर्पूरी जी को त्यागपत्र देना पड़ा।
1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने मुंगेरीलाल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण लागू कर बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया। उच्च जाति के लोगों छात्रों खास तौर पर जनसंध ने इसके खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। आरक्षण के मुताबिक 26% आरक्षण में सरकार ने 128 जातियों को चिन्हित किया। जिसमें अकलियत के बैकवर्ड भी शामिल थे। इन 128 जातियों में 94 अति पिछड़े थे। 26% नौकरियां पिछडो की दो श्रेणियां में मुंगेरीलाल कमीशन के अनुसार विभक्त की गई। बिहार की 30% जनसंख्या सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से कमजोर थी। दलित जो की 14% प्रतिशत थे उनका 14 परसेंट आरक्षण, तथा जनजाति को 10 परसेंट पिछड़ों के साथ-साथ तीन फ़ीसदी सवर्ण जातियो को आर्थिक
आधार पर तथा महिलाओं को भी सरकारी नौकरी में तीन फिसदी आरक्षण दिया गया। कर्पूरी जी
कि आरक्षण नीति मंडल कमीशन से बहुत पहले बनी थी।
.कर्पूरी जी के इन कड़े फैसलों का दूरगामी असर हुआ। जहां उनकी तरफदारी मैं पिछड़े, गरीब, अकलियत जन-समूह उनके पीछे लामबंद हो गए। वहीं ऊंची जाति वालें इनके दुश्मन भी बन गए। हालांकि आरक्षण का हथियार इतना पैना था कि उच्च जाति के नेता भी ऊपरी तौर पर इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
.कर्पूरी जी की सादगी, ईमानदारी, शराफत तथा गरीबों के प्रति हमदर्दी मैं कोई दो राय किसी के मन में नहीं थी। परंतु उनकी राजनीतिक रणनीति परअलग-अलग राय जरूर थी।
कर्पूरी जी ने कई राजनीतिक फैसले ऐसे किए जिस पर आपत्ति व्यक्त की गई। सत्ता के प्रति लचीले गठबंधन का रुख उनमें हमेशा बना रहा।
1967 में बिहार में बनने वाली सरकार मे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की नीतियों के खिलाफ वीपी मंडल को सरकार में शामिल करने की रजामंदी भी इनकी थी। परंतु डॉक्टर राममनोहर लोहिया ने इसको किसी भी कीमत पर कबूल नहीं किया, जिसके कारण सरकार गिर गई। 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी विधायक दल के नेता श्री रामानंद तिवारी चुने गए। कांग्रेस के भोला पासवान शास्त्री की सरकार गिरने के बाद विपक्ष की बिहार में सरकार बनाने की कवायद शुरू हुई,विपक्षी दलों में जनसंध भी एक महत्वपूर्ण घटक था। रामानंद तिवारी के मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना थी, परंतु कर्पूरी जी को लगा कि अगर यह हो जाएगा तो हम पीछे छूट जाएंगे। उस समय कर्पूरी.ठाकुर समर्थको ने तर्क दिया कि हमें जनसंध जैसी सांप्रदायिक पार्टी के साथ सरकार नहीं बनानी चाहिए। रामानंद तिवारी भी इससे सहमत हो गए और उन्होंने जनसंध के विरुद्ध एक वक्तव्य भी जारी कर दिया। परंतु एक साल के अंदर ही जनसंध की मदद से कर्पूरी जी मुख्यमंत्री बन गए।
जारी है,

  • Related Posts

    शिक्षा और सामाजिक न्याय की क्रांतिकारी प्रतीक सावित्रीबाई फुले
    • TN15TN15
    • March 10, 2026

    नीरज कुमार भारतीय समाज के इतिहास में कुछ…

    Continue reading
    डा. राममनोहर लोहिया की 117 वीं जन्मतिथि  मनाने की तैयारी जोरो पर 
    • TN15TN15
    • March 2, 2026

    भारतीय समाजवादी विचार के प्रवर्तक , भारत ,…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    इन देशों के पास अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल! 

    • By TN15
    • March 18, 2026
    इन देशों के पास अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल! 

    सारा अर्जुन ने दुनिया के सामने बताया असली धुरंधर

    • By TN15
    • March 18, 2026
    सारा अर्जुन ने दुनिया के सामने बताया असली धुरंधर

    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने गोली मारकर की शख्स हत्या, बवाल, भड़के पप्पू यादव

    • By TN15
    • March 18, 2026
    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने गोली मारकर  की शख्स हत्या, बवाल,  भड़के पप्पू यादव

    राज्यसभा सांसदों के लिए PM मोदी की फेयरबल स्पीच, खरगे और शरद पवार का जिक्र कर क्या कहा

    • By TN15
    • March 18, 2026
    राज्यसभा सांसदों के लिए PM मोदी की फेयरबल स्पीच, खरगे और शरद पवार का जिक्र कर क्या कहा

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी है भारत की 3 लाख मीट्रिक टन LPG, सरकार ने बताया जहाजों का ‘एग्जिट प्लान’

    • By TN15
    • March 17, 2026
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी है भारत की 3 लाख मीट्रिक टन LPG, सरकार ने बताया जहाजों का ‘एग्जिट प्लान’

    पाकिस्तान ने काबुल में 400 निर्दोष लोगों को एयर स्ट्राइक में मारा, गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं…’

    • By TN15
    • March 17, 2026
    पाकिस्तान ने काबुल में 400 निर्दोष लोगों को एयर स्ट्राइक में मारा, गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं…’