अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो स्वागत किया है पर उनके मित्र इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस सीजफायर को मानने से इंकार कर दिया है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या अमेरिका इजरायल की इस धमकी को कोई तवज्जो देगा। ऐसे में पीएम मोदी इजरायल से दोस्ती रखेंगे या फिर डोनाल्ड ट्रंप से।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के साथ उम्मीद है कि इलाके में शांति और स्थिरता आएगी। साथ ही आवाजाही, व्यापार की स्वतंत्रता फिर से बहाल होगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर में गंभीर आर्थिक अड़चनें खड़ी हुईं और कई देशों को जानमाल का नुकसान हुआ। ,उन्होंने बातचीत से स्थायी समझौते की उम्मीद जताई।
पीएम मोदी ने एक्स पर किया पोस्ट
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘मैं पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करता हूं। इस तनाव ने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान खड़ा किया है और कई देशों में जानमाल का नुकसान हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि ‘भारत को उम्मीद है कि इस समझौते के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने और नौवहन एवं व्यापार की स्वतंत्रता तय करने में मदद मिलेगी। हम बाकी मुद्दों पर विचार-विमर्श के माध्यम से एक स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं।
ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून) को ट्रुथ पर पोस्ट कर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन चुकी है.स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे. इसमें अमेरिका से जेडी वेंस और ईरान से अराघची और गालिबफ शामिल होंगे. 60 दिनों के सीजफायर के दौरान समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी. इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फ्रीज फंड को रिलीज करने से लेकर परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. जब तक फाइनल समझौता लागू नहीं हो जाता, अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।







