उम्र तो वही हे जो है पर मनुष्य की जीने की गति बहुत तेज़ हे।वो सब कुछ जल्दी से पा लेना चाहता है।वक़्त ही नहीं देता ,भला बुरा सोचने का और न हजम करने का।शरीर दिमाग थक जाता है इस दौड़ में।जो बीमारियां बुजुर्ग अवस्था में आनी होती हैं वो जवानी में आने लगती हैं।सब कुछ जल्दी जल्दी।तो ज़ाहिर सी बात है कि के वो उस मुकाम(अंतिम सांस) तक जल्दी पहुँच जाता है।आज के समय में अपनी उम्र को कम करने में काफी हद तक मनुष्य स्वयं जिम्मेदार है। पहले की अपेक्षा अब के रहन-सहन के तरीकों, खानपान और व्यवहार में काफी अंतर आ गया है जोकि इंसान की उम्र को कम कर रहा है।इसके अतिरिक्त मनुष्य के जीवन में तनाव भी बढ़ता जा रहा है, जिसका असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।यह धारणा कि लोगों की उम्र कम हो रही है, एक जटिल मुद्दा है जिस पर विभिन्न कारकों का प्रभाव पड़ता है। जबकि कुछ लोग दावा करते हैं कि जीवनशैली में बदलाव और पर्यावरण प्रदूषण के कारण उम्र कम हो रही है, वहीं कुछ अन्य लोग आधुनिक चिकित्सा और बेहतर जीवनशैली के कारण जीवन प्रत्याशा में वृद्धि का उल्लेख करते हैं।
जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, और फल-सब्जियों की कमी के कारण पोषण की कमी हो सकती है, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है।व्यायाम की कमी के कारण हृदय रोग, मोटापा, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जो जीवन प्रत्याशा को कम कर सकती हैं।अत्यधिक तनाव से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।वायु और जल प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी समस्याएं, हृदय रोग, और कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं, जो उम्र को कम कर सकती हैं।गरीबी और आर्थिक असमानता के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम हो सकती है, जिससे बीमारियों का समय पर इलाज नहीं हो पाता है और जीवन प्रत्याशा कम हो सकती है।शिक्षा की कमी के कारण स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और आदतों के बारे में जागरूकता कम हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।कुछ संक्रामक रोगों, जैसे कि एचआईवी/एड्स, का प्रसार जीवन प्रत्याशा को कम कर सकता है।
नशीली दवाओं और शराब का दुरुपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और जीवन प्रत्याशा को कम कर सकता है।यह स्पष्ट नहीं है कि लोगों की उम्र कम हो रही है। कुछ लोग दावा करते हैं कि जीवनशैली में बदलाव और पर्यावरण प्रदूषण के कारण उम्र कम हो रही है, वहीं कुछ अन्य लोग आधुनिक चिकित्सा और बेहतर जीवनशैली के कारण जीवन प्रत्याशा में वृद्धि का उल्लेख करते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जीवन प्रत्याशा कई कारकों पर निर्भर करती है, और उम्र कम होने या बढ़ने का दावा करने से पहले सभी कारकों पर विचार करना आवश्यक है।पहले के लोग शुद्ध वातावरण में रहते थे और शुद्ध भोजन करते थे। अब पर्यावरण में वह स्वच्छता नहीं रह गई है। प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण हवा भी शुद्ध नहीं रह गई है जिसका जिम्मेदार मनुष्य स्वयं है ।आप थोड़ी देर के लिए ही किसी सड़क पर निकल जाइए तो पेट्रोल और डीजल के धुएं से आपका बुरा हाल हो जाता है।आज मामूली किसी दूरी के लिए कोई पैदल चलना नहीं चाहता है।व्यापारी भी अपने थोड़े से लाभ के लिए हर चीज में मिलावट करते हैं ,जिसके कारण शुद्ध भोजन भी नहीं मिल पाता है और मिलावट के कारण शरीर को हानि पहुंचती है।आधुनिक रहन-सहन के कारण व्यक्ति के तौर -तरीके बदल गए हैं ना वह समय से सोता है और ना ही उठता हैऔर ना ही उसका खान-पान ऋतु के अनुसार होता है। इससे भी उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। दूसरे से आगे निकलने की होड़ में इंसान स्वयं तनाव मोल ले लेता है। तनाव के कारण स्वास्थ्य को बिगाड़ लेता है।
बाहर खाने के चलन के कारण भी व्यक्ति स्वाद में अच्छा पर नुकसानदेह भोजन करता है ,जिसका लाभ उसके शरीर को नहीं मिलता।कभी इच्छा तो कभी मजबूरी में उसे बाहर का भोजन अधिक करना पड़ता है जो कि नुकसानदेह है।कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इतने लापरवाह होते हैं कि किसी बीमारी का उचित इलाज भी नहीं कराते और सावधान तब होते हैं जब लोग अपनी आखिरी अवस्था में पहुंच चुका होता है।समाज में हालांकि कुछ लोग बहुत सतर्क हैं वे लाभदायक चीजें ही खाते हैं और उचित और सरल जीवन जीते हैं जिसके कारण वे लंबा जीवन जीते देखे जाते हैं। ऐसे लोगों से आधुनिकता की दौड़ में भागते हुए लोगों की संख्या ज्यादा है ,जो जीवन को गंभीरता से नहीं लेते हैं और उसको मौज -मस्ती का एक साधन मानते हुए स्वयं की उम्र कम कर लेते हैं ।
– ऊषा शुक्ला








