राज्यसभा में NDA का दबदबा, 150 सीटों तक पहुंचा आंकड़ा; दो-तिहाई बहुमत से अब सिर्फ 13 सीट दूर

राज्यसभा में भी एनडीए का पलड़ा भारी

 

नई दिल्ली। देश की सियासत में लगातार बदल रहे समीकरणों के बीच राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष का पलड़ा और भारी होता नजर आ रहा है। ताजा राज्यसभा चुनाव, झारखंड में क्रॉस वोटिंग, AAP और TMC में सियासी उथल-पुथल के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उच्च सदन में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। 26 सीटों पर हुए चुनाव में 19 सीटें जीतकर NDA की संख्या 150 तक पहुंच गई है और अब वह दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से महज 13 सीट दूर रह गया है।

राज्यसभा के ताजा चुनावी नतीजों ने संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में NDA की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। 26 सीटों पर हुए चुनाव में NDA ने 19 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी कुल संख्या 150 तक पहुंचा दी है। अब गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 163 से केवल 13 सीट पीछे रह गया है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन को 6 सीटें मिलीं, जबकि मिजोरम की जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया।

 

26 सीटों के चुनाव में NDA का दबदबा

 

राज्यसभा चुनाव के ताजा दौर में कुल 26 सीटों का फैसला हुआ, जिनमें NDA ने 19, कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन ने 6 और मिजोरम की सत्तारूढ़ ZPM ने एक सीट पर जीत हासिल की। इससे राज्यसभा में NDA की कुल ताकत बढ़कर 150 सदस्यों तक पहुंच गई है। 245 सदस्यीय सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सीटों की जरूरत होती है और अब NDA इस आंकड़े से सिर्फ 13 सीट दूर है।

 

 

झारखंड में क्रॉस वोटिंग से बड़ा उलटफेर

 

 

NDA की सबसे बड़ी सफलता झारखंड में देखने को मिली, जहां गठबंधन समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने क्रॉस वोटिंग की मदद से बड़ा उलटफेर करते हुए जीत दर्ज की। जबकि राज्य विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है। झारखंड की दूसरी राज्यसभा सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीती। दूसरी ओर मिजोरम में सत्तारूढ़ ZPM के उम्मीदवार के. लालत्लुआंगकिमा ने राज्य की एकमात्र सीट जीतकर पार्टी को पहली बार राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिलाया।

 

 

11 जून के निर्विरोध चुनाव से भी मिला फायदा

 

 

इससे पहले 11 जून को 8 राज्यों की 24 सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। इनमें 19 उम्मीदवार NDA और 5 उम्मीदवार कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के थे। ताजा चुनावी परिणामों के साथ NDA की स्थिति उच्च सदन में पहले से अधिक मजबूत हो गई है, जबकि कई विपक्षी दल आंतरिक संकट का सामना कर रहे हैं।

 

 

TMC और AAP के घटनाक्रम से बढ़ी बढ़त

 

 

पीटीआई सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और पार्टी में बड़े राजनीतिक संकट के बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव NDA के लिए नई संभावनाएं लेकर आए हैं। यदि NDA तीनों सीटें जीतने में सफल रहता है तो उसकी संख्या 150 से बढ़कर 153 हो जाएगी और वह दो-तिहाई बहुमत से केवल 10 सीट दूर रह जाएगा। इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) में राघव चड्ढा की अगुवाई में हुए विभाजन के बाद 7 राज्यसभा सांसदों के NDA के साथ आने से भी गठबंधन की ताकत में जोरदार बढ़ोतरी हुई थी।

 

 

क्षेत्रीय दल निभा सकते हैं अहम भूमिका

 

इन घटनाक्रमों के बाद राज्यसभा में इंडिया गठबंधन की प्रभावी संख्या घटकर करीब 64 सांसद रह गई है, जबकि कई क्षेत्रीय दल अब भी सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने की स्थिति में हैं। खासतौर पर वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के 7 और बीजू जनता दल (BJD) के 6 सांसद भविष्य में महत्वपूर्ण विधेयकों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

 

 

उत्तर प्रदेश और लोकसभा की चुनौती बाकी

 

हालांकि NDA की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है। इस साल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जहां विधानसभा में बदली राजनीतिक स्थिति के चलते समाजवादी पार्टी अपनी सीटों की संख्या बढ़ा सकती है। वहीं लोकसभा में संविधान संशोधन जैसे विधेयकों के लिए आवश्यक 363 सीटों के दो-तिहाई बहुमत से NDA अभी काफी दूर है। ऐसे में फिलहाल गठबंधन का पूरा ध्यान राज्यसभा में अपनी संख्या और मजबूत करने पर बना हुआ है।

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