लेकिन आज वर्ष 2026 में स्थिति देखिए। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मिल रहा है, यानी 2012 के मुकाबले कम कीमत पर तेल उपलब्ध है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल 100 से 110 रुपये प्रति लीटर क्यों बिक रहा है? यह देश के हर नागरिक का गंभीर सवाल है। असल मुद्दा यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को इतना कमजोर कर दिया गया कि डॉलर लगातार मजबूत होता चला गया और रुपया कमजोर होता चला गया। जब डॉलर मजबूत होगा और रुपया कमजोर होगा, तो विदेशों से खरीदी जाने वाली हर चीज महंगी होगी। तेल भी महंगा पड़ेगा, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और उसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। लेकिन जनता को यह सच्चाई साफ-साफ नहीं बताई जाती कि आखिर रुपया इतना कमजोर क्यों हुआ? आज केवल यह कहना कि “अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा है” पूरी सच्चाई नहीं है। क्योंकि अगर यही कारण होता, तो 2012 में जब तेल 111 डॉलर प्रति बैरल था तब पेट्रोल-डीजल 65-70 रुपये कैसे मिल रहा था? और आज जब तेल 106 डॉलर प्रति बैरल है, तब पेट्रोल-डीजल 100-110 रुपये क्यों बिक रहा है?
इसका सबसे बड़ा कारण रुपये की कमजोरी और आर्थिक नीतियों की विफलता है। अगर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती, रुपया मजबूत होता, तो आम जनता को इतनी महंगाई का सामना नहीं करना पड़ता। मैं कहता हूँ कि अगर नरेंद्र मोदी जी और उनकी पूरी टीम में हिम्मत है, तो डॉलर के मुकाबले रुपये को फिर मजबूत करके दिखाइए। रुपये को फिर उस स्तर पर लाइए जहाँ एक डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत खड़ा हो सके। जिस दिन रुपया मजबूत होगा, उसी दिन महंगाई तेजी से नियंत्रण में आने लगेगी। पेट्रोल-डीजल सस्ता होने लगेगा। खेती की लागत कम होगी, ट्रांसपोर्ट सस्ता होगा और आम आदमी को राहत मिलेगी। लेकिन दुख की बात यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बजाय केवल प्रचार और बयानबाजी ज्यादा दिखाई देती है। बार-बार यह आलाप रागा जाता है कि पूरी दुनिया में तेल महंगा है, जबकि सच्चाई यह है कि 2012 के मुकाबले आज तेल की कीमत कम है, लेकिन रुपये की कमजोरी ने जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा दिया है। इस सच्चाई को छिपाया नहीं जाना चाहिए।
वृजेश यादव बागी
नागरिक अधिकार मंच








