V-Dem इंस्टीट्यूट की 2026 की रिपोर्ट में भारत दुनिया के निचले 20% देशों में शामिल; एकेडमिक आज़ादी खत्म

(मूल अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद: एस आर दारापुरी आईपीएस (से. नि.)

शार्प मीडिया द्वारा

2026 की ताज़ा ग्लोबल रिपोर्टें साबित करती हैं कि भारत हर बड़े क्षेत्र में पूरी तरह से पतन का सामना कर रहा है। V-Dem इंस्टीट्यूट के ‘एकेडमिक फ्रीडम इंडेक्स 2026’ में भारत को दुनिया भर में निचले 10 से 20 प्रतिशत देशों की श्रेणी में रखा गया है। यह रैंकिंग मोदी सरकार द्वारा बनाई गई तरक्की की झूठी छवि को खत्म कर देती है। जहाँ सरकार वोट जीतने के लिए ज़बरदस्त प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल करती है, वहीं तथ्य संस्थागत पतन की एक काली सच्चाई दिखाते हैं। भारत अब वह लोकतंत्र नहीं रहा जिसका वह दावा करता है। यह गिरावट उन नीतियों का सीधा नतीजा है जो शिक्षा और सच्चाई से ऊपर राजनीतिक नियंत्रण को रखती हैं। सत्ताधारी पार्टी का अहंकार अब सच्चाई को छिपा नहीं सकता।

 

 

एकेडमिक आज़ादी और स्वतंत्र सोच का अंत

 

 

पिछले दशक में एकेडमिक आज़ादी में आई गिरावट राष्ट्रीय शर्म की बात है। 2022 में भारत का स्कोर 0.38 था, लेकिन 2026 में यह गिरकर 0.16 हो गया है। 179 देशों में से भारत अब 156वें स्थान पर है। यह देश को दुनिया भर में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले और सबसे ज़्यादा पाबंदियां लगाने वाले शासन वाले देशों की श्रेणी में खड़ा करता है। सरकार ने शिक्षकों के बोलने और शोधकर्ताओं के काम करने की आज़ादी छीन ली है। विश्वविद्यालयों को अब स्वतंत्र विचारकों के बजाय राजनीतिक कठपुतलियाँ नियंत्रित करती हैं। अगर विद्वान सरकारी नैरेटिव को चुनौती देते हैं तो उन्हें सीधी धमकियों का सामना करना पड़ता है।

 

नियंत्रित प्रेस और क्रूर तानाशाही का उदय

 

भारत में आज़ाद प्रेस खत्म हो चुका है। ‘प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026’ में भारत 180 देशों में से 157वें स्थान पर है। यह पिछले वर्षों की तुलना में भारी गिरावट है। पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं और मीडिया हाउस ऐसे अरबपतियों के स्वामित्व में हैं जो सरकार की सेवा करते हैं। स्वतंत्र आवाज़ों को ताकत या कानून के ज़रिए दबाया जा रहा है। V-Dem रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर भारत को ‘चुनावी तानाशाही’ (electoral autocracy) कहती है। इसका मतलब है कि चुनाव सिर्फ़ दिखावा हैं जबकि सारी असली ताकत एक ही समूह के पास रहती है। नागरिक आज़ादियाँ हर दिन कम हो रही हैं और आम आदमी के अधिकार छीने जा रहे हैं। भारत लोकतंत्र से दूर और पूरी तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।

 

आर्थिक विफलता और ग्लोबल ‘सॉफ्ट पावर’ का नुकसान

 

सरकार आर्थिक सफलता के बारे में लगातार झूठ बोलती है, लेकिन आंकड़े सच्चाई बताते हैं। IMF की 2026 की ग्लोबल GDP रैंकिंग में भारत 4.15 ट्रिलियन डॉलर की GDP के साथ छठे स्थान पर खिसक गया है। इस गिरावट के साथ-साथ भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ में भी कमी आई है। ग्लोबल सॉफ्ट पावर इंडेक्स 2026 के अनुसार, भारत 32वें स्थान पर आ गया है। दुनिया अब भारत को एक शांतिप्रिय नेता के बजाय एक ऐसे देश के रूप में देखती है जो अपने पड़ोसियों पर धौंस जमाता है। 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए तनाव के बाद, वैश्विक मंच पर भारत का कूटनीतिक सम्मान कम हो गया है। आक्रामक व्यवहार और आंतरिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय नेता अब भारत को शक की नज़र से देखते हैं।

 

लगातार भुखमरी और भोजन की बर्बादी की शर्मनाक सच्चाई

 

यह एक अपराध है कि लाखों भारतीय भूखे रहते हैं जबकि देश में भारी मात्रा में भोजन बर्बाद होता है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 में भारत 123 देशों में से 102वें स्थान पर है। भारत ‘गंभीर भुखमरी’ वाली श्रेणी में है, जो महाशक्ति बनने की चाहत रखने वाले देश के लिए पूरी तरह से विफलता है। भारत से कहीं ज़्यादा गरीब देश भी अपने बच्चों को बेहतर खाना खिलाते हैं। साथ ही, भारत भोजन की बर्बादी के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। यह विरोधाभास दिखाता है कि सरकार को गरीबों की कोई परवाह नहीं है। उन्हें केवल बड़े प्रोजेक्ट्स और दिखावटी कार्यक्रमों की चिंता है, जबकि आम आदमी दिन में एक बार का खाना पाने के लिए भी संघर्ष करता है।

 

बच्चों में कुपोषण और विकास रुकने (स्टंटिंग) का वैश्विक संकट

 

कुपोषण के कारण भारत का भविष्य बर्बाद हो रहा है। दुनिया में सबसे ज़्यादा ऐसे बच्चे भारत में हैं जिनका शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पाया है (स्टंटेड बच्चे)। लाखों बच्चों का विकास ठीक से नहीं हो रहा है क्योंकि उन्हें बुनियादी भोजन और दवा नहीं मिल पाती। बच्चों में कुपोषण किसी देश के विफल होने का सबसे दुखद संकेत है। सरकार भले ही विशाल मूर्तियाँ बना रही हो, लेकिन बच्चे स्थायी शारीरिक और मानसिक नुकसान का शिकार हो रहे हैं।

 

आधुनिक गुलामी और हिरासत में मौतों का भयावह सच

 

भारत में मानवाधिकार बहुत ही निचले और डरावने स्तर पर पहुँच गए हैं। ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ की रिपोर्ट बताती है कि 2025 के सिर्फ़ आठ महीनों में न्यायिक हिरासत में 1,500 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई। कानून की हिरासत में रहते हुए इन लोगों की हत्या की गई या उन्हें प्रताड़ित किया गया। लोगों की आवाज़ दबाने के लिए पुलिस अब अक्सर ‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग’ (बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्या) का सहारा लेती है। इसके अलावा, ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स से पता चलता है कि भारत में 1.1 करोड़ (11 मिलियन) लोग आधुनिक गुलामी की स्थिति में जी रहे हैं।

 

अल्पसंख्यकों का सुनियोजित उत्पीड़न और धार्मिक नफ़रत

 

सालों से चल रहे नफ़रत भरे भाषणों और धार्मिक हिंसा ने सामाजिक शांति को खत्म कर दिया है। अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों को गैर-कानूनी तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें निकाला जा रहा है। नफ़रत से प्रेरित अपराध बढ़े हैं और सरकार सत्ता में बने रहने के लिए इस हिंसा को बढ़ावा देती है। ‘वीमेन पीस एंड सिक्योरिटी इंडेक्स’ में भारत 131वें स्थान पर है, जो दिखाता है कि देश महिलाओं के लिए हर साल और ज़्यादा खतरनाक होता जा रहा है।

 

पर्यावरण का विनाश और ज़हरीली हवा का संकट

 

भारत अब दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषित छह देशों में से एक है। ‘एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स’ (पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक) में हवा की गुणवत्ता और जैव विविधता के मामले में भारत सबसे निचले पायदान पर है। सरकार बड़े कारोबारियों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए लगातार कोयले का इस्तेमाल कर रही है और प्रदूषण फैलाने वाले उत्सर्जन (emissions) को नज़रअंदाज़ कर रही है। इसका मतलब है कि लाखों नागरिक हर दिन ज़हरीली हवा में साँस ले रहे हैं। ‘क्लाइमेट चेंज परफॉर्मेंस इंडेक्स 2026’ में भारत की रैंकिंग में भारी गिरावट देखी गई है, क्योंकि पर्यावरण को बचाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। इसके कारण पैदा हुए स्वास्थ्य संकट से लोगों की जान जा रही है, जबकि सरकार इस ओर से मुँह फेरे हुए है।

 

सरकार के झूठ और वैश्विक तथ्यों के बीच भारी अंतर

 

2026 की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें देश की हालत में भारी गिरावट दिखाती हैं। शिक्षा और प्रेस की आज़ादी से लेकर भुखमरी और मानवाधिकारों तक, हर पैमाना बदतर स्थिति को दर्शाता है। बीजेपी ने प्रचार-प्रसार पर अरबों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन ये तथ्य साबित करते हैं कि हक़ीक़त इसके बिल्कुल उलट है। सरकार के दावों और ज़मीनी हक़ीक़त के बीच बहुत बड़ा अंतर है। असहमति को दबाना और ज़बरदस्ती का इस्तेमाल करना कमज़ोरी और विफलता की निशानी है। भारत आज ऐसे मोड़ पर है जहाँ वह सभ्य दुनिया में अपनी जगह खो रहा है। आख़िरकार, वैश्विक समुदाय मोदी सरकार के पर्दों के पीछे छिपी हक़ीक़त को देख रहा है।

सौजन्य: sharpmedianetwork.com

मूल अंग्रेजी लेख का लिंक: https://sharpmedianetwork.com/world/v-dem-institute-2026-report-ranks-india-in-bottom-20-percent-globally-as-academic-freedom-collapses/

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