दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: खुद कमाने में सक्षम व्यक्ति को भरण-पोषण नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति खुद कमाने में सक्षम है, उसे पति या परिवार से भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) की मांग नहीं करनी चाहिए। यह फैसला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पारित किया गया, जो पत्नी, बच्चों और माता-पिता को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन बेकार बैठे रहने को प्रोत्साहित नहीं करता।
केस का बैकग्राउंड शादी: दिसंबर 2019 में हुई।

 

घटना: पत्नी ने आरोप लगाया कि पति और उसके परिवार द्वारा क्रूरता के कारण फरवरी 2021 में वह सिंगापुर से भारत लौट आईं। भारत आने पर आर्थिक तंगी के कारण उन्हें गहने बेचने पड़े और मामा के घर रहना पड़ा।
याचिका: जून 2021 में पत्नी ने अलग रह रहे पति से भरण-पोषण की मांग की। निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की।
पति का पक्ष: पत्नी हाईली क्वॉलिफाइड (ऑस्ट्रेलिया से पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री) है, शादी से पहले दुबई में अच्छी कमाई कर रही थी, और कमाने में पूरी तरह सक्षम है। यह कानून का दुरुपयोग है।

 

कोर्ट का तर्क

 

जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने फैसले में कहा कि धारा 125 पति-पत्नी के बीच समानता बनाए रखने और जरूरतमंदों को सुरक्षा देने के लिए है, लेकिन यह आलस्य को बढ़ावा नहीं देती। कोर्ट ने नोट किया:

पत्नी सुशिक्षित है, अच्छे अनुभव वाली है, और भारत लौटने के बाद नौकरी तलाशने का कोई सबूत नहीं पेश किया।
वह व्यावसायिक गतिविधियां फिर से शुरू करने के बजाय बेकार बैठी रहीं, जबकि अन्य अशिक्षित महिलाएं पूरी तरह पति पर निर्भर होती हैं।
कोर्ट ने सलाह दी: “एक सुशिक्षित पत्नी, जिसके पास अच्छी नौकरी का अनुभव हो, उसे केवल अपने पति से भरण-पोषण पाने के लिए बेकार नहीं बैठे रहना चाहिए। इसलिए, मौजूदा मामले में अंतरिम भरण-पोषण की मांग को मंजूर नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट ने जोर दिया कि सक्षम व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और सक्रिय रूप से रोजगार तलाशना चाहिए।
अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
अंतरिम भरण-पोषण की मांग अस्वीकार।
यह फैसला महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करता है, खासकर जब वे योग्य और स्वस्थ हों।

यह निर्णय लिंग समानता को मजबूत करता है और कानूनी दुरुपयोग रोकने में मददगार साबित हो सकता है।

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