दृष्टिहीन बेटे की मौत दुखद
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने मुलताई दंगों की आग में उजड़े स्वर्गीय नामदेव बचले और उनकी पत्नी स्वर्गीय सरिता बचले के दृष्टिहीन पुत्र नीतीश की संदिग्ध मौत पर गहरा खेद व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी को पत्र लिखकर मामले में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने तथा पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने की मांग की है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि हमारा सिस्टम एक दृष्टिहीन बेटे को उसकी मौत तक न्याय नहीं दिला सका।
उन्होंने बताया कि मुलताई दंगों के दौरान दंगाइयों द्वारा नामदेव बचले के ठेले में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई थी, जिसके बाद आर्थिक तंगी से परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। बाद में उनकी पत्नी सरिता बचले की बीमारी से मृत्यु हो गई। इसके बाद परिवार चलाने की पूरी जिम्मेदारी दोनों मूकबधिर और दृष्टिहीन बेटों के कंधों पर आ गई थी।
डॉ. सुनीलम ने बताया कि उन्होंने मूकबधिर और दृष्टिहीन नीतीश एवं शुभम बचले से उनके निवास पर मुलाकात के बाद जिलाधीश से फोन पर चर्चा की थी तथा लिखित पत्र देकर पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, दो ठेलों के नुकसान के एवज में 65 हजार रुपये मुआवजा तथा सरकारी नौकरी देने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि जिलाधीश ने आश्वस्त किया था कि दोनों भाइयों का पुनर्वास किया जाएगा, दुकान शुरू कराई जाएगी तथा कम से कम 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते न्याय दिलाने की कार्रवाई की होती, तो आज नामदेव बचले, उनकी पत्नी सरिता बचले तथा उनका दृष्टिहीन बेटा तीनों जीवित होते।
डॉ सुनीलम ने आज मुलतापी थाना प्रभारी , मुलतापी एस डी एम से उक्त मुद्दों पर फोन पर बातचीत की।
जिलाधीश फोन पर उपलब्ध नहीं हो सके।






