भारत के आखिरी छोर पर वक्फ ने हड़पी जमीन, सतीशन के CM बनते ही ईसाई-हिंदू बेदखल क्यों?

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। देश के सबसे आखिरी छोर पर बसे राज्य केरल में राज्य वक्फ बोर्ड ने मुनंबम में विवादित 404 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार के उम्मीद पोर्टल पर चुपचाप रजिस्टर्ड कर लिया है, जिससे जमीन सधे उसके प्रशासनिक नियंत्रण में आ गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मामला वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष विचाराधीन है, जो इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह जमीन वक्फ संपत्ति की श्रेणी में आती है। हाल ही में केरल में वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही एर्नाकुलम के मुनंबम गांव के निवासियों से जुड़ा जमीन का यह विवाद एक बार फिर भड़क उठा है। पूरे भारत में वक्फ के पास सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा संपत्ति बताई जाती है।

 

वक्फ ने मुनंबम में क्या किया, जो बना विवाद

 

यह जमीन 2019 में वक्फ बोर्ड के संपत्ति रजिस्टर में दर्ज की गई थी। निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई दशकों में फारूक कॉलेज प्रबंध समिति से भूखंड खरीदे थे और उनके पास वैध स्वामित्व दस्तावेज हैं। मुनंबम भूमि संरक्षण परिषद के संयोजक जोसेफ बेनी ने पोर्टल पर पंजीकरण को अवैध गतिविधि बताया है, जिसका उद्देश्य मामले को और जटिल बनाना है। परिषद ने केरल वक्फ बोर्ड को भंग करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।

 

क्या है भारत सरकार का उम्मीद पोर्टल

 

यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) पोर्टल केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा भारत भर में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, वास्तविक समय सत्यापन और निगरानी के लिए शुरू किया गया एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
इस कदम से कैथोलिक चर्च में आक्रोश फैल गया है, जिसने नव निर्वाचित मुख्यमंत्री वीडी सतीशान पर तीखा हमला बोला है। चर्च समर्थित मुखपत्र ‘दीपिका’ में प्रकाशित एक कड़े संपादकीय में चर्च ने चेतावनी दी है कि विवादित भूमि का रजिस्ट्रेशन केवल मुनंबम के 610 प्रभावित परिवारों के सामने की चुनौती नहीं है, बल्कि ‘धर्मनिरपेक्ष केरल के लिए ही एक खतरा’ है। लेख में आगे याद दिलाया गया है कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशान ने विपक्ष के नेता रहते हुए घोषणा की थी कि यदि उनका गठबंधन सत्ता में आता है तो इस मुद्दे को ’10 मिनट के भीतर हल’ किया जा सकता है।

 

 

सतीशन ने वक्फ बोर्ड पर बाधा डालने का आरोप लगाया

सीएम सतीशन ने बीते सोमवार को पिछली सरकार के कार्यकाल में गठित वक्फ बोर्ड पर यूडीएफ प्रशासन द्वारा मामले को शीघ्रता से सुलझाने के प्रयासों को जानबूझकर जटिल बनाने और बाधित करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा-आमतौर पर मुथावल्ली समुदाय को संबंधित वक्फ संपत्ति को उमीद पोर्टल पर पंजीकृत करना होता है। लेकिन इस मामले में वक्फ बोर्ड ने खुद पहल की है। इससे हमें दो समुदायों को आपस में लड़ाने का जानबूझकर किया गया प्रयास समझ में आता है। मुनंबम से किसी भी निवासी को बेदखल नहीं किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। भूमि कर के भुगतान में सुविधा प्रदान की जाएगी।
वीडी सतीशन, सीएम केरल

 

 

 

वक्फ ने कहा-केवल केंद्र के निर्देशों का पालन किया

 

केरल राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष केएस हम्सा ने तीखा पलटवार करते हुए जोर देकर कहा कि बोर्ड ने केवल केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन किया है। उन्होंने बताया कि मुनंबम विवाद में नवीनतम आदेश सुप्रीम कोर्ट का था, जिसने भूमि के संबंध में बोर्ड द्वारा उठाए गए तर्कों को वैध ठहराया था।
उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की ओर से वक्फ बोर्ड के तहत सभी संपत्तियों को 17 मई तक UMEED पोर्टल पर पंजीकृत करने का निर्देश था। हमने केवल प्रक्रिया का पालन किया है। मुनंबम भूमि से संबंधित सभी कार्यवाही सरकारी और न्यायिक हस्तक्षेप के अधीन हैं।

बोर्ड मुनंबम के लोगों को निर्दोष मानता है और फारूक कॉलेज के अधिकारियों को उन्हें गुमराह करने और अवैध रूप से संपत्ति बेचने के लिए जिम्मेदार ठहराता है। प्रत्येक संपत्ति का पंजीकरण सुनिश्चित करना वक्फ बोर्ड का कर्तव्य है। चूंकि फारूक कॉलेज के मुथावल्ली से भूमि का पंजीकरण कराने की अपेक्षा नहीं थी, इसलिए हमने स्वयं पहल की।

 

 

 

 

मुनंबम के निवासियों का संकट क्या है

 

 

केरल के एर्नाकुलम जिले में वेलंकन्नी चर्च के पास करीब 404 एकड़ जमीन राज्य वक्फ बोर्ड ने वक्फ संपत्ति घोषित कर दी। यहां
तकरीबन 600 लैटिन कैथोलिक ईसाई और हिंदू परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। वक्फ बोर्ड ने 1950 के एक वक्फ विलेख (डीड) का हवाला देते हुए इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दी। इसके बाद इन परिवारों को अपनी जमीन खाली करने के नोटिस मिलने लगे।

 

बीजेपी कर रही वक्फ का विरोध

 

केरल में बीजेपी वक्फ के इस कदम का विरोध कर रही है। उसका आरोप है कि वक्फ के इस कदम से इन हिंदू और ईसाई परिवारों की जमीनें छिन जाएंगी। वक्फ के खिलाफ स्थानीय निवासियों और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश है और इसे लेकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

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