Hindu Muslim Unity : झारखंड में एक जगह ऐसी भी जहां 380 सालों से मुस्लिम उठाते हैं रावण की इष्ट देवी मां चिंतामणि की डोली 

Hindu Muslim Unity : ऐतिहासिक बड़कागांव स्थित मौजा आनी में मुस्लिमों द्वारा की जाती है मां दुर्गा की डोली की अगवानी

जो लोग हिन्दू मुस्लिम को लेकर नफरत का माहौल बनाने में लगे रहते हैं। वे लोग जरा इस खबर को जरूर पढ़ लें। कैसे मुस्लिम हिन्दुओं के पवित्र त्यौहार नवरात्री में न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं बल्कि रावण की इष्ट देवी मां चिंतामणि की डोली उठाते हैं। दरअसल मां दुर्गा की शोभा यात्रा के लिए बांस से डोली बनाई जाती है, इसमें 7 प्रकार के पत्तों से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा को सवार किया जाता है। घर की महिलाओं की साड़ियों से ही डोली सजाई जाती है,  380 सालों से यहां रावण की इष्ट देवी मां चिंतामणि की डोली मुस्लिम उठाते हैं।

झारखंड की राजधानी रांची में हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में शामिल नवरात्री के दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने मिसाल पेश की है। दरअसल, यहां एक परंपरा है, जिसके तहत मुस्लिम समाज के लड़के मां दुर्गा की डोली की अगवानी करते हैं। 380 वर्षों से ऐतिहासिक बड़कागांव स्थित मौजा आनी में मुस्लिम भाइयों द्वारा मां दुर्गा की डोली की अगवानी की जाती रही है। युवा बड़कागांव से देवी घर जाने वाले रास्ते के साथ-साथ देवी घर की साफ सफाई भी करते हैं। इसी रास्ते से डोली पर सवार होकर मां दुर्गा की शोभायात्रा निकलती है।

बड़कागांव रियासत के ठाकुर और झारखंड के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के प्रथम सेवक ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने बताया कि देवी घर में दिए जाने वाले बलि के लिए रकसा कोहडा और दुंबा (भेड़) आज भी मुस्लिम समाज के लोग ही लाते हैं. सदियों से मुस्लिम समाज के लोग यहां की पूजा में बढ़-चढ़ कर हिसा लेते हैं। यहां की पूजा में धर्म की बाधाएं खत्म हो जाती हैं।

झारखंड की राजधानी रांची के जगन्नाथपुर में बड़कागांव रियासत स्थित शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के वंशजों के घर से यह भव्य मां दुर्गा की शोभायात्रा निकाली जाती है। मां दुर्गा की शोभा यात्रा के लिए बांस से डोली बनाई जाती है। इसमें 7 प्रकार के पत्तों से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा को सवार किया जाता है. घर की महिलाओं की साड़ियों से ही डोली सजाई जाती है. नगाड़े संग घंटे की धुन के साथ शोभायात्रा निकलती है।

380 सालों से चली आ रही इस शोभायात्रा और देवी घर में मां दुर्गा की पूजा में शामिल होने के लिए 51 गांव के लोग पहुंचते हैं। शोभा यात्रा से पहले राज परिवार की कुलदेवी मां चिंतामणि की पूजा होती है. चांदी से बनी मां चिंतामणि की प्रतिमा को भी देवी घर में लाया जाता है, जहां उनकी पूजा होती है।

16 भुजाओं वाली मां चिंतामणि की पूजा बेहद अनोखी और पौराणिक तरीके से होती है. इनकी डोली को नए वस्त्र के बजाय परिवार की महिलाओं की साड़ी से ही सजाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां चिंतामणि को रावण की इष्ट देवी भी कहा जाता है. रावण के संहार के लिए भगवान राम ने भी मां चिंतामणि की पूजा की थी.

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