‘हम मुट्ठियां भींचेंगे…’ – यह नारा हाल ही में नेपाल की सड़कों पर गूंजा, जहां Gen-Z युवाओं का गुस्सा भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ उफान पर आ गया। इस आंदोलन का चेहरा है 36 साल का नौजवान सुदन गुरुंग (Sudan Gurung), जिन्होंने युवाओं की निराशा को संगठित आंदोलन में बदल दिया। सुदन हामी नेपाल (Hami Nepal) नामक युवा-केंद्रित एनजीओ के संस्थापक और अध्यक्ष हैं, जो अब एक बड़े नागरिक आंदोलन में तब्दील हो चुका है। आइए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से।
सुदन गुरुंग कौन हैं?
- उम्र और पृष्ठभूमि: सुदन गुरुंग 36 वर्ष के हैं और नेपाल के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी युवावस्था में पार्टी और क्लबिंग जैसी जिंदगी से तौबा कर सामाजिक कार्य की राह चुनी। 2015 के भूकंप के बाद उन्होंने हामी नेपाल की नींव रखी, जो शुरू में आपातकालीन सहायता, रेस्क्यू ऑपरेशन, ब्लड डोनेशन कैंप और जागरूकता कार्यक्रमों पर केंद्रित था। 2020 में यह आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड हुआ और अब इसमें 1600 से ज्यादा सदस्य हैं। सुदन को एक पॉडकास्ट में “पार्टी करने वाले से सामाजिक कार्यकर्ता” के सफर के लिए जाना जाता है, जहां उन्होंने कहा कि नेपाल में प्रभावी इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की कमी ने उन्हें प्रेरित किया।
- सामाजिक योगदान: कोविड-19 महामारी के दौरान हामी नेपाल ने 520 ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों को दान किए, बिना खुद के लिए एक भी रखे। सुदन का मानना है कि सरकार लोगों की तकलीफों से अनभिज्ञ रहती है, इसलिए युवाओं को आगे आना पड़ता है। उन्होंने “Enough is Enough Movement” में भी हिस्सा लिया था। उनका संगठन गैर-राजनीतिक और स्वतंत्र है, जो युवाओं को पारदर्शिता और जवाबदेही सिखाता है।
नेपाली युवाओं के गुस्से को आंदोलन में कैसे बदला?
नेपाल सरकार ने 4 सितंबर 2025 को फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया था। इसका कारण प्लेटफॉर्म्स का रजिस्ट्रेशन न करना और फेक न्यूज, हेट स्पीच व फ्रॉड रोकना बताया गया। लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला माना, जो पहले से ही भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता, नेपोटिज्म (“नेपो बेबीज” या नेपोटिज्म के बच्चे) और कुप्रशासन से त्रस्त थे।
- सुदन की भूमिका: सुदन ने युवाओं के गुस्से को पहचाना और सोशल मीडिया (बैन से पहले) व अन्य नेटवर्क्स के जरिए इसे संगठित किया। 27 अगस्त को उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया: “अगर हम खुद बदलें, तो देश खुद बदल जाएगा। सवाल ये नहीं कि राजनेता कब बदलेंगे, सवाल ये है कि हम कब बदलेंगे?” 6 सितंबर को उन्होंने “नेपो किड्स” कैंपेन को सपोर्ट किया, जो राजनीतिज्ञों के बच्चों की लग्जरी लाइफस्टाइल को हाइलाइट करता था। 8 सितंबर को हामी नेपाल ने “यूथ्स अगेंस्ट करप्शन” के बैनर तले शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया। सुदन ने इंस्टाग्राम और डिस्कॉर्ड पर ग्रुप्स बनाए, जहां “कैसे प्रदर्शन करें” – जैसे यूनिफॉर्म पहनना, किताबें ले जाना – की गाइड शेयर की।
- आंदोलन की शुरुआत और विस्तार: प्रदर्शन काठमांडू से शुरू होकर पूरे नेपाल में फैल गया। युवा नेपाली झंडे लहराते हुए नारे लगाते रहे: “करप्शन बंद करो, सोशल मीडिया नहीं!” सुदन ने भावुक अपील की: “ये हमारा समय है, हमारी लड़ाई है, और ये हम युवाओं से शुरू होता है। हम मुट्ठियां भींचेंगे…”। प्रदर्शनकारियों ने संसद परिसर पर धावा बोल दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने वॉटर कैनन, टियर गैस, रबर बुलेट्स और लाइव राउंड्स का इस्तेमाल किया।
आंदोलन के परिणाम: हिंसा और सरकार का झुकना
- हिंसा का आंकड़ा: 8 सितंबर को कम से कम 19 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए। काठमांडू में कर्फ्यू लगाया गया, एम्बुलेंस जलाई गई, और संसद में घुसपैठ हुई। संयुक्त राष्ट्र और ह्यूमन राइट्स वॉच ने पुलिस की बलप्रयोग की निंदा की।
- सरकार का रिएक्शन: दबाव में कैबिनेट ने उसी शाम बैन हटा लिया। संचार मंत्री प्रिथ्वी सुभ्बा गुरुंग ने कहा, “Gen-Z की मांगों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया बैन हटाया जा रहा है।” होम मिनिस्टर रमेश लेखक ने इस्तीफा दे दिया। पीएम केपी शर्मा ओली पर इस्तीफे की मांग तेज हो गई, और स्थिति सरकार के कंट्रोल से बाहर बताई जा रही है। प्रदर्शन 9 सितंबर को भी जारी रहे, जहां युवा ओली सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
सुदन गुरुंग का प्रभाव और भविष्य
सुदन अब नेपाल के युवाओं के लिए प्रतीक बन चुके हैं – डिजिटल फ्रीडम, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का। उनका आंदोलन बांग्लादेश और इंडोनेशिया के युवा विद्रोहों से प्रेरित लगता है। नेपाल के 90% युवा इंटरनेट यूजर्स हैं, और यह आंदोलन दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया ने उनकी आवाज को ताकत दी। सुदन का कहना है कि युवा साइडलाइन नहीं रहेंगे; वे बदलाव लाएंगे।
यह आंदोलन नेपाल की राजनीति को हिला रहा है, और सुदन जैसे युवा नेताओं से उम्मीद है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई बनेगी। अगर नेपाल के युवा जागे, तो बदलाव अपरिहार्य है।






