गैस महंगी, किराया बढ़ा… इतनी सैलरी में कैसे चले घर, नोएडा में प्रोटेस्ट कर रहे मजदूरों का दर्द

नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन: महंगाई के आगे टूटते गुजारे का सच

 

83 आदि) में आज (13 अप्रैल 2026) फैक्ट्री मजदूरों (ज्यादातर गारमेंट/होजियरी यूनिट्स) का प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी है। कई जगह हिंसक हो गया—पत्थरबाजी, वाहन फूंके गए, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया। ट्रैफिक बुरी तरह जाम रहा।

 

मजदूरों का दर्द और मांगें

 

सैलरी: हेल्पर को 11,000-12,000 रुपये, ऑपरेटर को 13,000-13,500 रुपये महीना। कई को पिछले 4 साल में बहुत कम (कुछ को सिर्फ 39-300 रुपये) बढ़ोतरी मिली।
खर्च:
कमरा किराया: 4,000-7,000 रुपये।
गैस: सामान्य सिलेंडर 3,500-4,000 रुपये तक, ब्लैक में 400 रुपये प्रति किलो। कई को डॉक्यूमेंट्स न होने से कनेक्शन नहीं, छोटे सिलेंडर भरवाते हैं।
बच्चों की फीस, खाना, सफर—सब बढ़ा।

काम: 8 घंटे की बजाय 10-12 घंटे शिफ्ट, जबरन नाइट ड्यूटी, ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं, गाली-गलौज और बदतमीजी की शिकायतें।

 

 

मांगें

 

न्यूनतम सैलरी 18,000-20,000 रुपये (8 घंटे ड्यूटी)।
ओवरटाइम डबल रेट, वीकली ऑफ, बोनस समय पर।
हरियाणा की तर्ज पर बढ़ोतरी (हरियाणा में हाल ही में ~35% हाइक के बाद ~19,000 तक)।

मजदूर कह रहे हैं: “11 हजार में तो गैस सिलेंडर ही आ जाता है, घर कैसे चले? बच्चों को पढ़ाएं कैसे?”
क्यों बढ़ा गुस्सा?
महंगाई (LPG, राशन, किराया) लगातार बढ़ रही है, जबकि UP में न्यूनतम वेतन NCR में सबसे कम है (लगभग 10-11k रेंज)। हरियाणा के हाइक ने तुलना पैदा कर दी। कई साल से स्टैग्नेंट वेतन और काम के घंटे लंबे होने से फ्रस्ट्रेशन चरम पर।

 

प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

 

नोएडा प्रशासन और UP सरकार ने हाई लेवल कमेटी बनाई। CM योगी ने कहा—किसी के बहकावे में न आएं, सरकार मजदूरों के साथ है, बातचीत से हल निकलेगा।
कुछ कंपनियों ने छोटी बढ़ोतरी दी, लेकिन मजदूर मानने को तैयार नहीं।
पुलिस कह रही है—नौकरी न जाए, लेकिन हिंसा पर कार्रवाई होगी। ये प्रदर्शन सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं—ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद आदि में भी असर दिख रहा है।

 

बड़ा सवाल

 

शहरी इलाकों में रहने-खाने का खर्च बढ़ रहा है, लेकिन अनऑर्गनाइज्ड/कॉन्ट्रैक्ट लेबर की सैलरी और सुविधाएं (PF, ESI, सही डॉक्यूमेंट्स) पीछे छूट गई हैं। लंबे समय में कंपनियों को भी प्रोडक्टिविटी और लेबर रिटेंशन के लिए बेहतर पे और कंडीशंस देनी होंगी, वरना ऐसे आंदोलन बढ़ेंगे।
सरकार, ट्रेड यूनियन और इंडस्ट्री को मिलकर न्यूनतम वेतन रिव्यू, ओवरटाइम रूल्स और हाउसिंग/राशन सपोर्ट जैसे मुद्दों पर काम करना चाहिए। मजदूरों का ये दर्द नजरअंदाज नहीं किया जा सकता—ये परिवार चलाने की जंग है। अगर आप किसी खास फैक्ट्री या इलाके की डिटेल जानना चाहें तो बताएं। शांति से हल निकले, यही उम्मीद।

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