किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले विभिन्न किसान संगठनों ने किसान नेताओं की नाजायज एवं गैरकानूनी नजरबंदी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस कमिश्नर एवं जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन में किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा, किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा, सीटू के जिला अध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा तथा सीटू के जिला महासचिव रामस्वारथ की कथित अवैध नजरबंदी के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया। साथ ही यमुना प्राधिकरण के अधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह के भ्रष्टाचार के विरोध में जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा गया।

आज सुबह लगभग 11 बजे सैकड़ों की संख्या में किसान संघर्ष मोर्चा के विभिन्न संगठनों—किसान परिषद, किसान एकता संघ एवं किसान सभा—के कार्यकर्ता एकत्रित हुए। इसके बाद सभी ने पुलिस की तानाशाही एवं गैरकानूनी नजरबंदी के विरोध में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर तक मार्च किया और जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए।
धरने को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि देश में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है। बिना किसी अपराध और कानूनी प्रक्रिया के पुलिस द्वारा नजरबंदी करना पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई जारी रही तो किसान संगठनों द्वारा अधिकारियों के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि उन्हें पिछले दो दिनों से बिना किसी कारण पुलिस द्वारा घेरकर रखा गया है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रशासन द्वारा किसानों को लगातार झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के 10% प्लॉट, नए कानून लागू करने तथा आबादी निस्तारण जैसे मुद्दों पर वार्ता का आश्वासन 23 नवंबर को दिया गया था, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान हजारों किसान एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर मार्च करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे। प्रशासन से मांग की गई कि जल्द से जल्द किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता सुनिश्चित की जाए।
धरना समाप्त होने के बाद सैकड़ों कार्यकर्ता पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे, जहां संयुक्त पुलिस आयुक्त (ज्वाइंट सीपी) अजय कुमार को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उनसे किसानों के मुद्दों पर विस्तार से वार्ता की और अवैध नजरबंदी सहित पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। किसानों ने स्पष्ट कहा कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के की जा रही नजरबंदी पूर्णतः असंवैधानिक है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। संयुक्त पुलिस आयुक्त के समक्ष यह मांग भी रखी गई कि माननीय मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान किसानों के लंबित मुद्दों पर प्रशासन स्तर पर ठोस वार्ता सुनिश्चित कराई जाए। अधिकारियों द्वारा सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
इस प्रकार आज के प्रदर्शन के माध्यम से तीन ज्ञापन—जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर एवं माननीय मुख्यमंत्री—को सौंपे गए। इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रमोद शर्मा, वीर सिंह नगर, उदल आर्य, एडवोकेट विनोद, एडवोकेट गुरप्रीत, एडवोकेट संजीव कुमार, एडवोकेट दुर्गेश शर्मा, नरेश नगर, करतार नगर, संदीप भाटी, जगबीर नंबरदार, पप्पू भाटी, सुशील सोनपुर, जितेंद्र सिंहपुर, ओमवीर नगर, विनोद नागर, सतीश नगर, निशांत रावल, सुधीर रावल, प्रशांत भाटी, विक्रम नगर, जगदीश शर्मा, बाबा मेहरबान अली, अजय पाल भाटी, बुधपाल यादव, सुरेंद्र यादव, दुष्यंत सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।








