मुंगेर। भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति, बिहार के तत्वावधान में विभागीय पूर्व आचार्य सम्मेलन का आयोजन सरस्वती विद्या मंदिर, लल्लू पोखर, मुंगेर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन में मुंगेर विभाग के विभिन्न विद्यालयों से जुड़े पूर्व आचार्यगण सम्मिलित हुए और संस्था से जुड़ी अपनी भावनात्मक स्मृतियां एवं शिक्षण अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा, जिला निरीक्षक सतीश कुमार सिंह, विभाग संयोजक प्रो. रामादर्श प्रसाद सिंह, सहसंयोजक अमरनाथ केसरी, सेवा प्रमुख परमेश्वर कुमार, विद्यालय समिति अध्यक्ष धनंजय प्रसाद राय, रमन कुमार एवं सह-संघचालक विनय शर्मा की उपस्थिति रही।
संचालन पूर्व आचार्य प्रमुख कुंज बिहारी ने किया जबकि प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने पूर्व आचार्यगण को संस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि,
> “वे अतीत के गौरवशाली पृष्ठ हैं, जिनके अनुभव वर्तमान को दिशा देते हैं। विद्यालयों को चाहिए कि वे इन अनुभवों को संकलित कर नवाचार्यों को अध्ययन हेतु उपलब्ध कराएं।”
प्रो. रामादर्श प्रसाद सिंह ने कहा कि पूर्व आचार्य संस्था के स्तंभ हैं और उनके अनुभव प्रेरणा की खान हैं। जिला निरीक्षक सतीश कुमार सिंह ने पूर्व आचार्य सम्मान को संस्था की संस्कृति का प्रतीक बताया।
अमरनाथ केसरी ने कहा कि
> “पूर्व आचार्यों के अनुभव केवल शैक्षणिक नहीं, अपितु आत्मीयता, अनुशासन और सेवा भाव के भी संवाहक हैं।”
कार्यक्रम में सभी पूर्व आचार्यों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने शिक्षण काल की यादें साझा कर सभा को भावविभोर कर दिया।
सम्मेलन के उपरांत संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत संस्कृति ज्ञान महाअभियान को लेकर प्रधानाचार्यों की बैठक हुई। प्रदीप कुमार कुशवाहा ने इसे राष्ट्र निर्माण से जुड़ा अभियान बताते हुए कहा कि
> “यह केवल परीक्षा नहीं, एक चेतना है – जिसे शिक्षक, विद्यार्थी और पालक मिलकर जनआंदोलन बनाएं।”
कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल पूर्व आचार्यों का अभिनंदन था, बल्कि शिक्षा के मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति को पुनर्स्थापित करने का एक सशक्त प्रयास भी सिद्ध हुआ।








