नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने औपचारिक रूप से ऐलान कर दिया कि वे राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। नामांकन की आखिरी तारीख आज ही है और चुनाव 16 मार्च 2026 को होगा। इससे उनका मुख्यमंत्री पद समाप्त हो जाएगा (वर्तमान में 10वां कार्यकाल)। उन्होंने कहा, “नई सरकार बनेगी, उसे मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।” यह बिहार में “नीतीश युग” के अंत की शुरुआत है। NDA की 2025 विधानसभा जीत के बाद BJP को पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
नीतीश कुमार ने कभी भी केंद्र या राज्य की किसी भी सरकार के बावजूद सत्ता में बने रहने का रिकॉर्ड बनाया — चाहे NDA हो, महागठबंधन हो या कोई भी गठबंधन। वे 1985 से विधायक, लोकसभा सांसद, केंद्रीय मंत्री और 2000 से मुख्यमंत्री (रिकॉर्ड 10 बार शपथ) रहे। अब 75 साल की उम्र में वे राज्यसभा जा रहे हैं, जिससे उनकी एक अधूरी ख्वाहिश (संसद के दोनों सदनों में सेवा) पूरी हो रही है। नीतीश कुमार की राजनीतिक सफर की पूरी क्रोनोलॉजी (मुख्य मील के पत्थर)

 

प्रारंभिक जीवन और शुरुआत (1951-1985)

 

1 मार्च 1951: नालंदा के बख्तियारपुर में जन्म। पिता आयुर्वेदिक डॉक्टर।
बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग। कुछ समय बिजली बोर्ड में नौकरी।
जेपी आंदोलन और राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से प्रभावित। इमरजेंसी (1975) में भूमिगत रहे, 9 महीने जेल।
1977: राजनीति में सक्रिय प्रवेश।
1985: हरनौत (नालंदा) से पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव जीते (MLA)।

केंद्र में प्रवेश और मंत्री पद (1989-2004)

1989: बारh से लोकसभा सांसद (कई बार जीते: 1989-2004 तक)।
1990: वी.पी. सिंह सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (कृषि)।
1994: जॉर्ज फर्नांडीस के साथ समता पार्टी की स्थापना।
1996: समता पार्टी का BJP-NDA से गठबंधन।
1998-2004: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 5 बार केंद्रीय मंत्री — रेलवे, सतह परिवहन, कृषि। (उल्लेखनीय: रेलवे में इंटरनेट टिकटिंग, तत्काल योजना शुरू की; 1999 गैसल हादसे के बाद नैतिकता के आधार पर इस्तीफा)।

मुख्यमंत्री पद का सफर: 10 बार शपथ, गठबंधन का मास्टर (2000-2026)
नीतीश कुमार 2005 से लगातार (कुछ छोटे ब्रेक के साथ) सत्ता में रहे। उनका जुमला “किसी की भी सरकार, सीएम नीतीश कुमार” इसी से आया।

2000 (पहली बार, सिर्फ 7 दिन): विधानसभा चुनाव में कोई बहुमत नहीं। राज्यपाल ने NDA (समता पार्टी) को मौका दिया। 3 मार्च 2000 को शपथ, लेकिन विश्वास मत हारने पर 10 मार्च 2000 को इस्तीफा।
2005 (दूसरी बार): फरवरी में हंग असेंबली, फिर अक्टूबर-नवंबर चुनाव। NDA (JD(U)+BJP) को बहुमत। 24 नवंबर 2005 को शपथ। “सुशासन बाबू” की छवि बनी — कानून-व्यवस्था, विकास। 2010 तक चली।
2010 (तीसरी बार): NDA को भारी बहुमत। लगातार दूसरा पूर्ण कार्यकाल। 17 मई 2014 को लोकसभा में JD(U) की हार के बाद इस्तीफा। जीतन राम मांझी CM बने।
2015 (चौथी-पांचवीं बार): मांझी विवाद के बाद वापसी। 2015 विधानसभा में महागठबंधन (JD(U)+RJD+कांग्रेस) की भारी जीत। 20 नवंबर 2015 को शपथ। तेजस्वी यादव डिप्टी CM।
2017 (छठी बार): तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से इस्तीफा। अगले दिन BJP समर्थन से NDA सरकार। 27 जुलाई 2017 को शपथ।
2020 (सातवीं बार): NDA को बहुमत (125 सीटें)। 16 नवंबर 2020 को शपथ।
2022 (आठवीं बार): 9 अगस्त 2022 को NDA से अलग होकर महागठबंधन में वापसी। 10 अगस्त 2022 को शपथ।
2024 (नौवीं बार): जनवरी 2024 में महागठबंधन छोड़कर NDA में वापसी। 28 जनवरी 2024 को शपथ। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा डिप्टी CM।
2025-2026 (दसवीं बार): नवंबर 2025 बिहार चुनाव में NDA को 202 सीटों का बहुमत। 20 नवंबर 2025 को शपथ। PM मोदी ने बधाई दी। (यह कार्यकाल 16 मार्च 2026 तक चला।)

2026: राज्यसभा की ओर (नया अध्याय)

5 मार्च 2026: राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान। नामांकन दाखिल करने की तैयारी।
16 मार्च 2026: राज्यसभा चुनाव और शपथ (संभावित)। मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे। नई NDA सरकार बनेगी (BJP का CM बनने की संभावना)। नीतीश ने कहा — “मैं बिहार विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी बिहार की आवाज बनूंगा।”
JD(U) कार्यकर्ता भावुक, कुछ नेताओं में नाराजगी, लेकिन नीतीश की मर्जी से फैसला। बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की अटकलें। नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (करीब 20 साल) रहे। उन्होंने पलटू राम या पलटी मास्टर के नाम से भी चर्चा बटोरी, लेकिन “सुशासन” की छवि आज भी बरकरार है। अब दिल्ली (राज्यसभा) में नई भूमिका। बिहार की राजनीति में यह एक बड़े बदलाव का संकेत है।

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