एक पेड़ मॉ के नाम अभियान और लाखों पेड़ों की कटाई : कैसे बचेंगे जंगल?

सिंगरौली में गौतम अडानी को दी 06 लाख पेड़ काटने की परमीशन!

आदिवासियों की आस्‍था और आजीविका पर प्रहार

अमेरिका में अडानी पर चल रहा है केस, आखिर अडानी को लेकर संवेदनशील क्‍यों है मोदी सरकार?

देश को बदनाम करने का काम किया है अडानी ने

 

विजया पाठक 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस 2024 पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की शुरुआत की थी। यह राष्ट्रव्यापी अभियान मां के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करता है। वहीं मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अडानी समूह को धिरौली कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2,672 हेक्टेयर (लगभग 6,600+ एकड़) वन और निजी भूमि आवंटित की गई है। इस परियोजना के कारण लगभग 06 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करने की परमीशन दी है। अब सवाल उठता है कि एक तरफ एक पेड़ मॉ के नाम अभियान के तहत पर्यावरण का संदेश दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर गौतम अडानी को लाखों पेड़ काटने की परमीशन दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की यह दोहरी नीति लोगों को रास नहीं आ रही है। सिंगरौली का यह 2,672 हेक्टेयर कुल क्षेत्र है, जिसमें 1,397 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि शामिल है। परियोजना के लिए लगभग 6 लाख से 10 लाख पेड़ काटे जाने की आशंका है। अडानी की धीरौली खदान की उत्पादन क्षमता 6.5 मिलियन टन प्रति वर्ष तय की गई है। इसमें से 05 मिलियन टन कोयला खुली खदानों से और शेष उत्पादन भूमिगत खनन से निकाला जाएगा। इस ब्लॉक में कुल 620 मिलियन मीट्रिक टन सकल भू-गर्भीय भंडार मौजूद है। वहीं, शुद्ध भंडार 558 मिलियन मीट्रिक टन है। कंपनी का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष 2027 तक खुली खदान की अधिकतम क्षमता हासिल कर ली जाए। जबकि भूमिगत खनन लगभग 09 साल बाद शुरू किया जाएगा। अदानी पॉवर को यह ब्लॉक 30 साल के पट्टे पर दिया गया है। अदानी पावर कंपनी के पास फिलहाल 1,200 मेगावॉट क्षमता वाला बिजली संयंत्र है। योजना है कि आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 3,200 मेगावॉट किया जाए। इसके लिए धीरौली खदान से कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यहां कई बड़ी कोयला खदानें और बिजली संयंत्र पहले से सक्रिय हैं। 03 मार्च 2021 को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद से इस पर विवाद जारी है। स्थानीय आदिवासियों की जमीन और आजीविका (महुआ, तेंदू, जलाऊ लकड़ी) पर संकट का आरोप लग रहा है।

 

सवाल यह नहीं कि जंगल क्यों कटे

 

सवाल यह है कि किसकी अनुमति से, किसकी चुप्पी से यह सब हुआ? आज सिंगरौली पूछ रहा है, क्या आदिवासी इंसान नहीं हैं? क्या उनका जंगल, उनकी ज़मीन सिर्फ कागज़ पर है? सरकार ने 204 करोड़ रुपये में पूरा जंगल अडानी को सौंप दिया, जबकि वहां 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कोयला है।

 

आक्‍सीजन का बैंक रहे हैं सिंगरौली के जंगल

 

सिंगरौली जिले के अत्यंत पिछड़े विकासखंड देवसर में 1400 हेक्टेयर वन भूमि को अड़ानी समूह को कोयला उत्खनन के लिए केंद्र सरकार ने आवंटित कर दिया। लगभग 6 लाख पेड़ जो अधिकतर साल प्रजाति के है उनकी कटाई शुरू हो गई और अब तक 40,000 हज़ार पेड़ों को काट दिया गया है। साल के साथ, महुआ, चिरौंजी, आंवला, तेंदू, बीजा, बहेड़ा हर्रा प्रजाति के वृक्ष जो स्थानीय आदिवासी, वनवासी समुदाय के आजीविका का मुख्य साधन है। यह हजारों वर्षों से अनवरत जारी था अचानक आदेश से खत्म किया जा रहा है। सिंगरौली के जंगल अनादिकाल से विंध्य के ऑक्सीजन बैंक रहे हैं।

 

जंगल-जमीन खत्म कर बना रहे अडानी देश: जीतू पटवारी

 

आदिवासी परिवारों से मुलाकात के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ’10 हजार एकड़ भूमि पर जल-जंगल-जमीन खत्म कर एक नया अडानी देश बनाया जा रहा है। बिना किसी पर्यावरण, शासन या सामाजिक अनुमति के जंगल को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। आदिवासियों और स्थानीय लोगों को न मुआवजा मिला, न ही कोई पुनर्वास। जीतू पटवारी ने कहा कि यह कदम राज्य के 1.5 करोड़ आदिवासियों के अधिकारों पर हमला है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा, “मां के नाम पर एक पेड़ और अडानी के नाम पर लाखों पेड़,” यह मोदी सरकार के दोहरे मापदंडों को उजागर करता है। पिछले दिनों कांग्रेस की 12 सदस्यीय टीम सिंगरौली पहुंची थी।

 

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से सिंगरौली के आदिवासियों ने थी मुलाकात

 

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के आदिवासियों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इस दौरान आदिवासियों ने अपनी जमीनी समस्याओं से अवगत कराया। जिस पर राहुल-प्रियंका ने सिंगरौली आने का आश्वासन दिया है। कांग्रेस पार्टी ने वन एवं वनवासियों के हितों की सुरक्षा हेतु ऐतिहासिक पैसा एक्ट और वनाधिकार अधिनियम लाए परंतु इस बर्बर सत्ता ने इसे धीरौली के इकोसिस्टम, जैव विविधता और आदिवासी-वनवासी समुदाय को लाभ और सुरक्षा ना पहुंचे इसका पूरा प्रबंध किया। आदिवासियों ने उनके समक्ष अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने कहा कि सिंगरौली जिले में औद्योगिक गतिविधियों और खनन परियोजनाओं के कारण वह लंबे समय से विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

 

बढ़ सकती हैं अडानी की मुसीबतें

 

अडानी ने अमेरिका में भी बहुत बड़ा फ्रॉड किया है। इस फ्रॉड पर अमेरिका की अदालत में केस चल रहा है। मामला 20 नवंबर 2024 के उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया था कि 2020 से 2024 के बीच सोलर प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रिश्वत दी गई। अमेरिका पिछले 14 महीने से अडानी को समन देना चाहता है, इसके लिए मोदी सरकार से मदद मांगी है, लेकिन नरेंद्र मोदी अपने परम मित्र को समन भेजने नहीं दे रहे हैं। आखिर अडानी को लेकर मोदी सरकार फेवर में क्‍यों रहती है। जबकि अडानी के कारण देश की काफी कि‍रकिरी हो रही है। इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग आपराधिक जांच कर रहा है, जबकि SEC गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ सिविल केस चला रहा है।

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