बड़ा एक्शन: कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों के रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट

CJP Protests: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस सख्त कार्रवाई की तैयारी में है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन की आड़ में हिंसा और उपद्रव करने वालों की पहचान की जा रही है. इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पासपोर्ट रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है.

सूत्रों के अनुसार, हिंसा में शामिल आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पहचान की जा रही है. जिन लोगों की भूमिका हिंसा में सामने आएगी, उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा.

 

हिंसा में शामिल लोगों पर एक्शन

 

दिल्ली पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, कानून-व्यवस्था भंग करने और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ऐसे आरोपियों के पासपोर्ट रद्द कराने के लिए भी संबंधित प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि भविष्य में उनके विदेश यात्रा संबंधी दस्तावेजों पर भी कार्रवाई की जा सके.

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हिंसा में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी जारी है. दूसरी तरफ, दिल्ली के उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निवारक हिरासत में लेने की दिल्ली पुलिस की शक्तियों को 18 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है. इस संबंध में दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने 15 जुलाई को अधिसूचना जारी की है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और हाल ही में संसद मार्च के दौरान हिंसा भी हुई थी.

 

 

18 अक्टूबर तक बढ़ाई गई दिल्ली पुलिस की शक्ति

 

 

अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली पुलिस आयुक्त को रासुका की धारा 3(2) के तहत किसी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लेने का अधिकार 18 अक्टूबर तक प्रदान किया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे व्यक्तियों को निवारक हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनकी गतिविधियों को भारत की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या शांति के लिए खतरा माना जाता है.

रासुका के तहत किसी व्यक्ति को तीन महीने से लेकर अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इससे पहले भी रिहा किया जा सकता है. चूंकि यह निवारक हिरासत (Preventive Detention) है, इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को सामान्य गिरफ्तारी की तरह तत्काल अदालत में पेश करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं होता.

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि रासुका के तहत यह अधिकार हर तीन महीने में नियमित रूप से बढ़ाया जाता है और इस बार भी किसी विशेष परिस्थिति या अनुरोध के आधार पर यह फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह अधिकार 1980 के दशक से लगातार दिया जाता रहा है.

 

 

प्रदर्शन के बीच बड़ा कदम

 

 

इस बीच दिल्ली पुलिस ने भी बयान जारी कर कहा कि रासुका के तहत शक्तियों का विस्तार पूरी तरह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है. पुलिस के मुताबिक, वर्तमान नवीनीकरण 19 जुलाई से 18 अक्टूबर की अवधि के लिए है और इसका आदेश 7 जुलाई को ही जारी कर दिया गया था, जो कॉजपा के विरोध-प्रदर्शन शुरू होने से काफी पहले का है. दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि इस मामले में कोई विशेष अनुरोध नहीं किया गया था और कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस फैसले को प्रदर्शन से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया गया है. पुलिस के अनुसार, यह केवल एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है.

गौरतलब है कि कॉजपा ने 20 जून से जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में आंदोलन शुरू किया था. सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च करने की कोशिश की थी, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं.

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