डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक्सीलेंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किये गए डॉ. आदिल हकीम खान “

नोएडा। अंतरष्ट्रीय अनुसन्धान केंद्र के प्रमुख एवं ऐरो एजुकेशनल इंस्टिट्यूट द्वारका दिल्ली के निर्देशक डॉ आदिल हकीम खान को महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी नॉएडा कैंपस में हिंदी दिवस 14 सितम्बर पर आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक्सीलेंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत जी थे, इस कार्यक्रम में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पौत्र श्री सुब्रमण्यम शर्मा जी भी उपस्थित थे ।

 

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के जॉइंट सेक्रेटरी स्किल डेवलपमेंट डॉ आर पी सिंह जी ,डॉ पी के राजपूत जी पूर्व सीनियर वाईस प्रेजिडेंट कैडिला फार्मास्यूटिकल ,नॉएडा मैनेजमेंट एसोसिएशन के प्रेजिडेंट डॉ योगेंद्र सिंह जी आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर शिक्षा जगत एवं इंडसट्री जगत के कई बुद्धिजीवी उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ खान ने कहा की डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक्सीलेंस अवार्ड 2025 से उन्हें सम्मानित करने के लिए सभी का तहे दिल से शुक्रिया हर अवार्ड या पुरस्कार जीवन में कुछ न कुछ सीखने का अवसर प्रदान करता है और अपने विचारों को व्यक्त करना और दुसरो के विचारो को सुनना इस प्रकार के आयोजन को सफल बनाता है। मेँ इस अवसर पर महर्षि यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर,डायरेक्टर्स,एवं डॉ हर्षवर्धन जी का भी विशेष आभारी हु जिन्होंने मुझे इस अवार्ड्स से पुरस्कृत किया। इस अवसर पर डॉ खान ने कहा की शिक्षा तो सिर्फ सीखने -सिखाने का द्वार है वक़्त के साथ इसमें कई परिवर्तन आये है पर शिक्षा का मूल स्वरुप आज भी वही है जो आदि काल में थी बस टेक्नोलॉजी के उपयोग ने इसे आसान कर दिया है। सर्व शिक्षित समाज में शिक्षा में नयी तकनीक का प्रयोग इसको नए आयाम दे रहा है। AI जैसे मॉडर्न टूल उसको और गति प्रदान कर रहे है। मुझे याद आता है वह समय जब हम लोग यूनिवर्सिटी में अध्ययन करते थे और कई पुस्तके जो सिर्फ यूनिवर्सिटी में 1 या 2 की संख्या में होती थी कोई छात्र उस बुक को इशू करवा लेता था तो पूरी क्लास उस पुस्तक के लिए परेशान होती थी। पर आज सूचना क्रांति ने कितना बड़ा बदलाव ला दिया ही के हर बुक आप को कंप्यूटर,मोबाइल आदि पर उपलब्ध है। कोई भी छात्र उसका उपयोग करके पुस्तक ज्ञान अर्जित कर सकता है। पर आज के समय में ज्ञान के माध्यम तो बहुत है परन्तु असल बात तो उसको अपने जीवन में उतारने की है। इस अवसर पर कई संस्थाओं के डायरेक्टर्स ,प्रिंसिपल्स आदि उपस्थित थे।

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