8 जनवरी को न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी ग्लोबल पावर पर एकमात्र लिमिट उनकी “ओन मोरैलिटी” (खुद की नैतिकता) है, और “I don’t need international law” – यानी अंतरराष्ट्रीय कानून की उन्हें जरूरत नहीं।
यह बयान वेनेजुएला में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन (मादुरो को पकड़ने और हमलों) और ग्रीनलैंड को हासिल करने की धमकियों के बैकग्राउंड में आया है। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका के हित सबसे ऊपर हैं, और कानूनी बंधन उन्हें रोक नहीं सकते। आज तक की हेडलाइन ने इसे ठीक ऐसे ही कैप्चर किया: “अपुन ही भगवान है… डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया ‘परवाह नहीं किसी इंटरनेशनल लॉ की'”। सोशल मीडिया पर भी यही मीम घूम रहा है – लोग कह रहे हैं ट्रंप खुद को ऊपर वाले से ऊपर समझने लगे हैं।
ट्रंप का स्टाइल तो हमेशा से ऐसा रहा है – अमेरिका फर्स्ट, बाकी सब सेकंडरी। लेकिन इस बार उन्होंने इसे इतना ओपनली कह दिया कि दुनिया में हंगामा मच गया। कुछ लोग चीयर कर रहे हैं, कुछ कह रहे हैं ये इंटरनेशनल ऑर्डर के लिए खतरा है।







