ट्रंप की तरह निक्सन भी बड़बोले थे, इंदिरा ने क्‍यों साधे रखी चुप्‍पी ?

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ निजी बातचीत में बेहद अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया था। डीक्लासिफाइड व्हाइट हाउस टेप्स से पता चलता है कि निक्सन ने इंदिरा गांधी को “old witch” (बूढ़ी चुड़ैल) कहा, जबकि किसिंजर ने उन्हें “bitch” कहा और भारतीयों को सामान्य रूप से “bastards” करार दिया। निक्सन ने भारतीयों को “slippery, treacherous people” भी बताया।

ये टिप्पणियां मुख्य रूप से कोल्ड वॉर के संदर्भ में थीं—अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन कर रहा था (जो उसका सहयोगी था और चीन से संपर्क का माध्यम), जबकि भारत सोवियत संघ के करीब था। निक्सन और किसिंजर बांग्लादेश संकट (पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार) में भारत के रुख से नाराज थे और युद्ध रोकना चाहते थे।

इंदिरा गांधी ने चुप्पी क्यों साधी?

इंदिरा गांधी को इन निजी टिप्पणियों की जानकारी उस समय नहीं थी, क्योंकि ये गोपनीय ओवल ऑफिस बातचीत थीं, जो दशकों बाद (2005 और बाद में) डीक्लासिफाइड हुईं। सार्वजनिक रूप से निक्सन ने इंदिरा को अपमानित किया—जैसे नवंबर 1971 की वाशिंगटन यात्रा में उन्हें 45 मिनट इंतजार करवाया और मीटिंग में ठंडा व्यवहार किया—लेकिन इंदिरा ने इसका जवाब उसी भाषा या सार्वजनिक बयानबाजी से नहीं दिया।

रणनीतिक संयम अपनाया:

  • वे जानती थीं कि ऐसे “बड़बोले” (loudmouth) नेताओं को वही प्रतिक्रिया सबसे ज्यादा पसंद होती है जो वे चाहते हैं—विवाद और ध्यान।
  • चुप्पी और ठहराव से इंदिरा ने अपनी रणनीति पर फोकस रखा: बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का समर्थन, युद्ध की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना।
  • जवाब मैदान में दिया—13 दिनों के युद्ध में भारत की निर्णायक जीत, बांग्लादेश का निर्माण और पाकिस्तान की हार। निक्सन की धमकियां (जैसे सातवां बेड़ा भेजना) बेकार साबित हुईं।

हालिया संदर्भ में (जनवरी 2026 का एक ऑपिनियन आर्टिकल) इसे डोनाल्ड ट्रंप के भारत या पीएम मोदी पर बयानों से जोड़ा गया है, जहां कहा गया कि इंदिरा की तरह संयम रखना ही ऐसी बड़बोली टिप्पणियों का सबसे अच्छा जवाब है—क्योंकि समय अंत में सच्चाई और मजबूती को साबित करता है। निक्सन को बाद में वाटरगेट कांड में अपमानित होकर इस्तीफा देना पड़ा, जबकि इंदिरा की रणनीति इतिहास में विजयी मानी जाती है।

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