विकास में चल रहा है विनाश,, ना कोई जवाबदेही ,,
कुछ वर्ष पहले छोटी सी घटना पर दूसरों से इस्तीफा मांगने वाले इस विकास पर क्या इस्तीफा देंगे,,
ये है हमारे “विकास मॉडल” का लाइव डेमो। 79 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट, और हालत ऐसी कि फीता काटने से पहले ही आग ने स्वागत कर दिया। अब कोई समझाए कि ये रिफाइनरी बनी है पेट्रोल बनाने के लिए या खुद जलने के लिए?
कल साहब लोग आएंगे, कैमरा चमकेगा, हेलीकॉप्टर उतरेगा, भाषण में “ऐतिहासिक”, “विश्वस्तरीय”, “नया भारत” जैसे शब्द उड़ेंगे, लेकिन जमीन पर क्या है? उद्घाटन से एक दिन पहले ही सिस्टम ने हाथ जोड़ दिए। ये वही देश है जहां जनता को बताया जाता है कि सब कंट्रोल में है, बस सवाल मत पूछो। 79 हजार करोड़ की चीज अगर चालू होने से पहले ही धुआं छोड़ने लगे तो समझ लो पैसा कम और लापरवाही ज्यादा लगी है।
अब वही पुराना खेल शुरू होगा, जांच कमेटी बनेगी, रिपोर्ट आएगी, फाइलों में दब जाएगी, और अगला उद्घाटन तैयार। जनता फिर ताली बजाएगी, क्योंकि और क्या ही ऑप्शन बचा है? सच ये है कि यहां प्रोजेक्ट कम और इवेंट ज्यादा बनते हैं। काम बाद में होता है, फोटो पहले। देश चलाना है या रील बनानी है, ये फैसला शायद किसी ने अभी तक किया ही नहीं। और हां, जो लोग हर बार आंख बंद करके “सब बढ़िया है” बोलते हैं, उन्हें ये आग भी शायद “विकास की चमक” ही लगेगी। बाकी जो थोड़ा दिमाग इस्तेमाल करते हैं, उन्हें ये साफ दिख रहा है कि चमक के नीचे कितना कच्चा काम पड़ा है।








