बुलंदशहर की स्याना विधानसभा सीट को ‘हॉट’ बना रही ‘देहाती गर्ल’

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन से बनाई विशेष पहचान

सपना चौधरी की रह चुकी हैं सुरक्षा गार्ड

अपने अड़ियल रवैये के लिए जानी जाती हैं पूनम पंडित

चरण सिंह राजपूत 
मोदी सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के विरोध में एक साल तक चले किसान आंदोलन में अपनी बेबाक भाषा के दम पर विशेष पहचान बनाने वाली पूनम पंडित अब राजनीति में किस्मत आजमा रही रही हैं। लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा देने वाली कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने पूनम पंडित को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की स्याना सीट से टिकट दिया है। पूनम पंडित की ठेठ देहाती भाषा युवा वर्ग में बहुत पसंद की जाती है। सोशल मीडिया पर भी पूनम पंडित के अच्छे खासे समर्थक हैं। पूनम पंडित जीतेंगी या फिर हारेंगी यह तो समय ही बताएगा पर उनके इस सीट से लड़ने के बाद स्याना हॉट सीट के नाम जानी जा रही है। यह सीट उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
देश का इतिहास गवाह है कि दौर बदलते रहते हैं। यह दौर स्थानीय मुद्दों का है। एक समय था कि किसी भी क्षेत्र की लोकल भाषा महानगरों में जाकर हास्यास्पद बन जाती थी। आज यही लोकल भाषा वरदान साबित हो रही है। अब हर क्षेत्र में लोकल भाषा नाम और दाम दोनों कमा रही है। चाहे पंजाबी गाने हों या फिर हरियाणवी, चाहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पसंद की जाने वाली रागनी हो या फिर क्षेत्रीय भाषा में बनी फिल्म या फिर वेब सीरीज। लोकल भाषा में बने कार्यक्रम देशभर में धूम मचा रहे हैं।  यही स्थिति राजनीति में भी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भाषा से किसान नेता राकेश टिकैत ने अलग पहचान बनाई है। यह लोकल भाषा में बोलने की पारंगता ही थी कि पूनम पंडित ने अकेले दम पर किसान आंदोलन में एक अलग पहचान बनाई। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रवक्ता के तौर पर किसान आंदोलन में एंट्री मारने वाले पूनम पंडित ने अपने अपनी बेबाक ठेठ देहाती भाषा के दम पर अपने को किसान आंदोलन का एक चर्चित चेहरा बना लिया। यह पूनम पंडित का क्षेत्र और किसान के प्रति जज्बा और लगाव ही था कि भारतीय किसान यूनियन (भानु) के किसान आंदोलन से हटने के बावजूद वह आंदोलन में न केवल टिकी रहीं बल्कि मुजफ्फरनगर पंचायत में उनको मंच पर न चढ़ने देने का भी उनके वजूद पर कोई असर नहीं पड़ा।  वह इस अन्याय के खिलाफ भी लड़ी और यह उनका यह व्यवस्था से लड़ने का तरीका ही रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें बुलंदशहर की स्याना सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है।
दरअसल पूनम पंडित इंटरनेशनल शूटर भी रह चुकी हैं। वह शूटिंग में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।रूरल यूथ गेम्स 2018 में 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। पूनम पंडित को ऐसे ही कांग्रेस ने टिकट नहीं दे दिया है। यह उनके जज्बे और लगन का ही परिणाम है कि आज वह यूथ में एक असरदार चेहरा हैं।
दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जितने भी नेता अपने दम पर उभरे हैं उनकी अपनी पहचान लोकल भाषा रही है। चाहे चौधरी चरण सिंह रहे हों, महावीर त्यागी रहे हों,  मायावती रही हों, कल्याण सिंह रहे हों, महेंद्र सिंह टिकैत रहे हों या फिर उनके बेटे नरेश टिकैत और राकेश  टिकैत। ये सब लोकल भाषा के नाम से ही जाने जाते रहे हैं।  पूनम पंडित मूल रूप से सिकंदराबाद ब्लाक क्षेत्र की इस्माइलपुर की रहने वाली हैं। इस क्षेत्र की भाषा का उन पर पूरा असर है। पूनम पंडित किसान आंदोलन से चर्चा में आईं हैं।
 एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्‍यू में पूनम पंडित ने कहा था कि उन्‍हें यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि वह सपना चौधरी की बाउंसर रहीं हैं। घर चलाने के लिए वह नौकरी करती थीं। यह पूनम पंडित का जज्बा ही था कि एक लड़की होते हुए भी वह अपना घर परिवार छोड़कर किसान आंदोलन में डटी रहीं। पूनम पंडित ने न केवल गाजीपुर बार्डर बल्कि सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर भी अलग पहचान बनाई। इतना ही नहीं वह पंजाब बार्डर पर वह किसानों के साथ रहीं। किसान आंदोलन के दौरान इलेक्ट्रानिक मीडिया व यूट्यूब पर पूनम पंडित ने अपनी बेबाक भाषा से खास पहचान बनाई है। पूनम के पिता विनोद पंडित का नौ साल पहले देहांत हो गया था। उनकी बहन पूजा पंडित व संध्या पंडित की शादी हो चुकी है। भाई पिंटू पंडित मेरठ में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करतेे हैं। पूनम पंडित स्थानीय मुद्दे भी उठाती रहती हैं। अब देखना है कि किसान आंदोलन में पहचान बनाने वाली पूनम पंडित राजनीति में क्या गुल खिलाती हैं।

दरअसल स्याना विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट मानी जाती है। इस सीट पर  2017 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। इस बार स्याना विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूनम पंडित को लड़ाने से यह सीट हॉट सीट हो गई है। इन विधानसभा चुनाव में स्याना सीट पर कांग्रेस से पूनम पंडित, भाजपा से देवेंद्र सिंह लोढ़ी, रालोद की और से दिलनवाज खान चुनाव लड़ रहे हैं तो बसपा से सुनील भारद्वाज ने परचा भरा है। 2017 में स्याना में कुल 54.15 प्रतिशत वोट पड़े थे। 2017 में भारतीय जनता पार्टी से देवेंद्र ने बहुजन समाज पार्टी के दिलनवाज खान को 71630 वोटों के मार्जिन से हराया था।

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