चरण सिंह
वक्फ संसोधन बिल के लोकसभा के साथ ही राज्य सभा में भी पारित होने के बाद अब इस पर कानून बनना तय है। कानून बनने के बाद अब एनडीए में मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती है। क्योंकि केंद्र में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री बीजेपी से हैं तो यही माना जाता है कि वक्फ संसोधन बिल बीजेपी ही लेकर आई है। ऐसे में जब मुस्लिम संगठनों के साथ ही विपक्ष ने भी लामबंदी के साथ वक्फ संसोधन बिल का विरोध करने की ठान ली है। देश भर में आंदोलन छिड़ चुका है।
प. बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखंड समेत कई प्रदेशों में आंदोलन शुरू हो चुका है। जुमे की नमाज पर भी मुसलमानों में बड़ा आक्रोश देखने को मिला। कानून बना नहीं कि तीन किसान कानूनों की तरह ही इस कानून को भी बदलवाने की बात की जाने लगी है। ऐसे में बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती है।
बीजेपी ने ये जो प्रचारित किया है कि वक्फ बोर्ड का फायदा आम मुसलमानों को नहीं बल्कि गिने चुने लोग ले रहे हैं। नेता और ब्यूरोक्रेट्स ले रहे हैं। बक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को कहना है कि वक्फ बोर्ड में संसोधन के नाम पर बीजेपी मुसलमानों की ईदगाह, कब्रें और मदरसों पर कब्ज़ा करना चाहती है। वक्फ की जमीन को पूंजीपतियों को देना चाहती है। ऐसे में केंद्र सरकार को जहां आंदोलन से निपटना है वहीं वक्फ बोर्ड का फायदा आम मुस्लिमों को कराना है। यदि वक्फ बोर्ड की जमीन पर उद्योग धंधे लगने लगे। पूंजीपतियों के अस्पताल या स्कूल खुलने लगे तो समझा जाएगा कि बीजेपी की नीयत वक्फ बोर्ड के प्रति ठीक नहीं थी। पूंजीपतियों को फायदा दिलाने के लिए यह बिल पारित कराया है।
हां यदि बीजेपी ने वक्फ बोर्ड का फायदा आम मुसलमानों को करा दिया तो यह समझा जाएगा कि बीजेपी ने संसोधन जनहित में किया है। ऐसे ही एनडीए में घटक दल जदयू, टीडीपी, आरएलडी, हम, लोजपा (रामविलास) की भी अग्नि परीक्षा है। ये दल भी संसोधन आम मुसलमानों के पक्ष में मान रहे हैं। ऐसे में यदि वक्फ बोर्ड की जमीन खुर्द-फुर्द कर दी जाती है तो एनडीए घटक दलों को भी मुसलमानों का आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
हां यदि बीजेपी ने वक्फ बोर्ड का फायदा आम मुसलमानों को करा दिया तो यह समझा जाएगा कि बीजेपी ने संसोधन जनहित में किया है। ऐसे ही एनडीए में घटक दल जदयू, टीडीपी, आरएलडी, हम, लोजपा (रामविलास) की भी अग्नि परीक्षा है। ये दल भी संसोधन आम मुसलमानों के पक्ष में मान रहे हैं। ऐसे में यदि वक्फ बोर्ड की जमीन खुर्द-फुर्द कर दी जाती है तो एनडीए घटक दलों को भी मुसलमानों का आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।