समाजवादी पार्टी के खिलाफ लामबंद हुई 36 बिरादरी!

चरण सिंह 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजपूतों ने फिर से हुंकार भरी है। इस बार उस समाजवादी पार्टी के खिलाफ यह हुंकार भरी गई है, जिस पार्टी को राजपूतों ने बीजेपी का विरोध कर जितवाया था। पहले बीजेपी नेता पुरुषोत्तम रुपाला के राजपूतों के खिलाफ टिप्पणी करने पर राजपूत गुस्से में थे तो इस बार समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने राणा सांगा के खिलाफ टिप्पणी करने पर आग बबूला हो उठे हैं। दोनों मामलों में एक बात तो सामने आई है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजपूत अपने मान सम्मान और अधिकार के प्रति जागरूक और संगठित हो रहे हैं। राजपूतों को संगठित करने का काम कर रहे हैं, किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह।पूरन सिंह ने लोकसभा चुनाव के समय पुरुषोत्तम रुपाला के खिलाफ मोर्चा खोलकर राजपूतों को बीजेपी के खिलाफ लामबंद किया था और चुनाव में राजपूतों की ताकत का एहसास करा दिया था। 70 से अधिक सीट जीतने का दावा करने वाली बीजेपी यूपी में 36 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। इस बार पूरन सिंह हर कार्यक्रम में बोल रहे हैं कि वह न तो रामजी लाल सुमन से माफ़ी मंगवाना चाहते हैं। न सदस्यता खत्म कराना चाहते हैं। पूरन सिंह ने कहा है रामजी लाल सुमन की सजा उन लोगों ने सजा तय कर ली है। उनको सजा मिलेगी 100 फीसदी मिलेगी। मतलब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूरन सिंह राजपूतों के नेता बनकर उभरे हैं।लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ललकार कर उन्होंने हरवाया था और इस बार समाजवादी पार्टी का इलाज करने की बात कर रहे हैं। मतलब विधानसभा चुनाव में राजपूत समाजवादी प्रति के खिलाफ पंचायत करेंगे। देखने की बात यह है कि राजपूत समाज से तमाम सांसद, विधायक और नेता हैं पर गत दिनों में देखने को मिला है कि राजपूतों के मान सम्मान की लड़ाई पूरन सिंह ने लड़ी है। पूरन सिंह की काम करने की खासियत यह है कि वह के ओर किसान मजदूर का मुद्दा उठाते हैं वहीं किसी भी समाज के महापुरुष के अपमान पर वह उठ खड़े होते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को नेता जाटलैंड के रूप में याद करते रहे हैं पर पूरन सिंह ने जिस तरह से लोकसभा में राजपूतों की महापंचायतें की और जिस तरह से अब मुजफ्फरनगर में 36 बिरादरियों की पंचायत की है। उससे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े नेता के रूप में उभरे हैं। यह पंचायत संयुक्त हिन्दू मोर्चा के बैनर तले हुई है। मतलब बात सीधी है कि बीजेपी के खिलाफ राजपूतों ने मोर्चा खोला था और समाजवादी पार्टी के खिलाफ 36 बिरादरी मोर्चा खोल रही है। तो क्या समाजवादी पार्टी की दिक्कत विधानसभा चुनाव में बढ़ने वाली है।मुजफ्फरनगर की यह 36 बिरादरियों की पंचायत विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ी भूमिका बनने वाली है। इस पंचायत का असर 12 अप्रैल को राणा सांगा की जयंती पर आगरा में देखने को मिलेगा। इस जयंती समारोह में करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना समेत तमाम राजपूत नेता पहुंच रहे हैं। देखने की बात यह है कि यह मुद्दा लोकसभा में भी उठा है। सड़क से लेकर संसद तक यह मुद्दा उठाया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही मामलों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम सामने आया था। बीजेपी के खिलाफ राजपूतों की लामबंदी में भी योगी की शह बताई जा रही थी तो समाजवादी पार्टी के खिलाफ लामबंदी में भी योगी आदित्यनाथ की शह बताई जा रही है।

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