इसी मानसून सत्र में अपनी दो और मांगे भी मनवानी पड़ेंगी सीजेपी को!

किसान अंदोलन तुड़वाने के लिए सभी मांगें मानने का दिखावा किया था मोदी सरकार ने

आंदोलन खत्म होने के बाद दिखा दिया था ठेंगा

छात्रों का उत्पीड़न रोकने के लिए उठाना होगा बड़ा कदम

चरण सिंह 
कॉकरोच जनता पार्टी को अपनी दो और मांग मनवानी है तो इसी मानसून सत्र में सरकार पर दबाव बनाना होगा। नहीं तो अब और कुछ नहीं मिलेगा। छात्रों को परेशानी झेलने पड़ेगी अलग से। यह सरकार इतनी आसानी से मानने वाली नहीं है। ये तो इस रणनीति पर काम कर रहे होंगे के इनके खिलाफ खड़े होने वाले युवाओं को कैसे सबक सिखाया जाए। तथाकथित हिंदुत्व के विचारक जीडी मोहन दास का बयान तो सुन लिया होगा न। कि यदि उसे अधिकार मिलता तो वह कर्फ्यू लगवा कर गोलियां चलवा देता। बेटियों के बारे में बोल रहा है कि इनके साथ यदि रेप होता तो ये शिकायत भी न करतीं क्योंकि इन्हें रेप पसंद है। यह सोच मोहनदास की ही नहीं यह सोच सत्ता में बैठे लोगों की है। इसलिए एक एक कदम रणनीति बनाकर चलना है।

दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी को किसान आंदोलन से सीख लेनी चाहिए थी। आंदोलन तोड़ने से पहले किसान नेताओं से कुछ य मशवरा कर लेना चाहिए था। इसी सरकार ने  जब किसान आंदोलन तुड़वाया था तो किसानों की सभी मांगे मानने का दिखावा किया था। आंदोलन टूटते ही सब कुछ भूल गई थी। किसानों की मांगों में प्रमुखता से किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने मांग थी। सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने के अलावा कुछ नहीं माना।

ऐसे ही जो हाथ में आ जाए उसे ही मानना चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया। सत्ता में बैठे ये लोग अब कुछ नहीं करने वाले हैं। दबाव बनाएंगे अलग से। कहां हैं आत्महत्या करने वाले छात्रों को दिए जाने वाले 20 करोड़ रुपए, कहां है लिखित में दिया गया वह पत्र जिसमें छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की बात लिखी गई हो।

सुप्रीम कोर्ट की भी चाल देखिये। यह तो बोल दिया कि सभी छात्रों को रिहा किया जाए पर साथ में यह भी जोड़ दिया कि जिन छात्रों का रिकार्ड आपराधिक होगा उनका बचाव नहीं होगा। आंदोलनकारियों को तो पुलिस अपराधी बना ही देती है। शासन प्रशासन का प्रयास होता है कि ऐसा माहौल बनाया जाए कोई आंदोलन हो ही न। ये सरकार तो अंग्रेजी हुकूमत की तर्ज पर  राज कर रही है। ये लोग तो हिटलर को अपना आदर्श मानते हैं। ये लोग इतनी आसानी से मानने वाले कहां हैं।
सत्ता में बैठे लोगों से निपटने के लिए तो देशभर के सभी छात्र संगठनों को एक होना होगा। कॉकरोच जनता पार्टी को भी अपनी राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला, ब्लॉक कार्यकारिणी बनानी होगी। बार बार कॉल पर देश का युवा आंदोलन नहीं करेगा। इन्हीं आंदोलनकारियों में से संगठन की जिम्मेदारी देनी होगी। कॉकरोच जनता पार्टी को यह समझना होगा कि भले ही आंदोलन का चेहरा अभिजीत दीपके हों पर आंदोलन वामपंथी संगठनों के कंधों पर था।
इस सरकार से जीतने के लिए वामपंथी छात्र संगठनों का साथ बहुत जरुरी है। नहीं तो एनएसयूआई के अलावा किसी राजनीतिक दल का कोई छात्र संगठन सड़कों पर नहीं दिखाई दे रहा था। मानसून सत्र चल रहा है। अभी हंगामा होगा तो परिणाम निकलने के चांस ज्यादा हैं। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी को अभी ही सरकार पर बाकी दो मांगों के लिए दबाव बनाना चाहिए।
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