थर्ड फ्रंट की तैयारी: यह विधानसभा चुनावों के नतीजों का असर है। 60 बरसों में पहली बार राज्य के दो प्रमुख दल- DMK और AIADMK सत्ता से बाहर हो गए। प्रदेश की बागडोर अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसफ विजय की नई पार्टी TVK को मिल गई। कांग्रेस ने TVK को समर्थन दे दिया, जिससे नाराज DMK ने कह दिया कि अब वह कांग्रेस के किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं। DMK थर्ड फ्रंट बनाने की फिराक में है और अरविंद केजरीवाल की AAP से बात कर रही है। इसके अलावा, पार्टी RJD और वामदलों से भी संपर्क साध रही है।
BJP की मंशा: BJP दूसरी ओर I.N.D.I.A गठबंधन में आई दरार का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। पार्टी अब संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए DMK से संपर्क कर रही है। अप्रैल में DMK ने इसका विरोध किया था, लेकिन अब BJP इसमें कुछ बदलाव के जरिये उसका समर्थन जुटाना चाहती है। अगर BJP ऐसा कर लेती है, तो अगले आम चुनावों के बाद तमिलनाडु में समीकरण बदल सकते हैं।
विकल्प की तलाश: तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में AIADMK के कमजोर होने से BJP पसोपेश की स्थिति में है। पलानीस्वामी के नेतृत्व में पार्टी लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव हार चुकी है। इस बार वह 234 में से सिर्फ 47 सीटें ही जीत पाई, जो पिछले 30 बरसों का सबसे खराब प्रदर्शन है। नतीजों के बाद AIADMK के 47 में से 25 विधायकों ने TVK को समर्थन दिया। पार्टी के भीतर लगातार बढ़ते असंतोष से NDA चिंतित है और इसी कारण BJP नए विकल्प तलाशना चाहती है।
मुश्किल है मेल: BJP नेताओं और DMK के बीच संपर्क की खबरों के बाद अगले लोकसभा चुनाव के संभावित समीकरण पर चर्चा तेज हो गई है। लेकिन, विश्लेषकों का मानना है कि DMK अगर BJP के साथ आती है, तो उसे नुकसान हो सकता है। बदले हुए परिसीमन विधेयक का समर्थन भी आसान नहीं होने वाला। विधानसभा चुनाव के बाद DMK की लोकप्रियता TVK के मुकाबले कमजोर है। और तमिलनाडु में BJP के हिंदुत्व वाले एजेंडे को भी व्यापक जनसमर्थन नहीं मिला है।
बड़ी चुनौती: BJP के सामने अपनी छवि बदलने की चुनौती भी है। इसके अलावा, AIADMK की कमजोर स्थिति के बीच भविष्य की रणनीति भी बनानी होगी। अन्नामलाई का इस्तीफा भी उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। अन्नामलाई ने जब पार्टी से इस्तीफा दिया तब उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाए और न सार्वजनिक रूप से कटुता जाहिर की। उन्होंने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और BJP अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और इस्तीफा सौंप दिया।
युवाओं को तरजीह: अन्नामलाई शुरू से BJP और AIADMK गठबंधन के खिलाफ रहे। तब केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी बात नहीं मानी। वह चाहते थे कि पार्टी अकेले चुनाव लड़े। चुनावी नतीजों ने उनकी इसी सोच को बल दिया है। पिछड़े तबके से आने वाले अन्नामलाई द्रविड़ पार्टियों की राजनीति से परे अपनी नई लकीर खींचना चाहते हैं। BJP छोड़ने के बाद उन्होंने ‘वी द लीडर’ नाम से अपना आंदोलन शुरू किया। लॉन्च के 24 घंटे के भीतर इससे 13 लाख से अधिक लोग जुड़ गए। पूर्व IPS अधिकारी अन्नामलाई की युवाओं में मजबूत पकड़ है। कई फैन क्लब भी बने हैं। उनका संदेश है कि तमिलनाडु की राजनीति में युवा वर्ग को केंद्र में रखना होगा।
मौन के मायने: ऐसे में कुछ राजनीतिक विश्लेषक अन्नामलाई के दिल्ली दौरे और सौहार्दपूर्ण विदाई को BJP नेतृत्व के मौन समर्थन के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि इसका राजनीतिक लाभ 2029 के लोकसभा चुनावों तक दिखाई दे सकता है। कहा जा रहा है कि BJP को इससे फायदा ही मिलेगा। ऐसे में सवाल है कि क्या अन्नामलाई तमिलनाडु में BJP का प्लान बी साबित होंगे, इसका जवाब समय ही देगा।







