एसकेएम 9 मार्च को दिल्ली जंतर मंतर पर किसान मजदूर संसद, 23 मार्च को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस और 10 मार्च से 13 अप्रैल तक देशभर में किसान पंचायतें करेगा आयोजित
कांग्रेस ने भोपाल में किसान पंचायत करने के बाद अब नागपुर और गंगानगर में रखी किसान पंचायतें
चरण सिंह
अमेरिका से ट्रेड डील में भारत के कृषि बाज़ार खोलने पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ ही कांग्रेस ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। जहां संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 9 मार्च को दिल्ली जंतर मंतर पर किसान मजदूर संसद लगने जा रही है। 23 मार्च को साम्राज्यवाद विरोध दिवस मनाया जा रहा है। 10 मार्च से लेकर 13 अप्रैल यानी कि जलियावाला बाग कांड तक देशभर में किसान पंचायतें होने जा रही हैं।
ऐसे ही कांग्रेस ने भोपाल में किसान पंचायत कर सोयाबीन किसानों को सचेत किया है। कांग्रेस की रणनीति है कि महाराष्ट्र नागपुर में किसान पंचायत कर कपास किसानों को भी सचेत किया जाएगा। ऐसे ही राजस्थान के गंगानगर में किसान पंचायत कर कांग्रेस मक्का किसानों को बड़ा संदेश देगी। मतलब इस बार का किसान आंदोलन राजनीतिक भी हो सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ ही कांग्रेस भी अमेरिकी डील को किसानों को बर्बाद करने वाला बता रही है।
इसी साल अप्रैल महीने में प. बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में भी चुनाव हैं। ऐसे में जहां क्षेत्रीय दल अभी अमेरिकी ट्रेड डील पर आंदोलन करने से बच रहे हैं वहीं कांग्रेस ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यह किसान आंदोलन 2020-21 से थोड़ा अलग हटकर होगा। इस आंदोलन में किसान मजदूर के साथ ही व्यापारी भी आएंगे। इस आंदोलन का फायदा चुनाव में उसे मिल सकता है।
दरअसल अमेरिका से यह जो डील होने जा रही है और इस डील में जिस तरह से अमेरिका के किसानों के लिए भारतीय कृषि बाज़ार खोला गया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि किसी बड़े दबाव में यह डील हुई है। हालांकि इस डील में सस्ते सामान के मिलने का राजनीतिक फायदा बीजेपी जरूर उठाना चाहेगी। खुद प्रधानमंत्री मोदी यह कहकर माहौल बना सकते हैं कि किसानों को नुकसान न करते हुए उन्होंने इस डील के माध्यम से लोगों को सस्ता खाद्यान्न उपलब्ध करा दिया है। जैसे कि दालों को इस डील से हटाने की बात खुद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने की है। इस डील में अन्य शब्द को जोड़कर सभी सामान अमेरिका में आने की बात की जा सकती है। बीजेपी का प्रयास है कि कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों से अलग कर विपक्ष को कमजोर किया जाए। क्षेत्रीय दल भी अपना वजूद बचाए रखने के लिए कांग्रेस से दूरी बनाकर चल रहे हैं। ऐसे ही कांग्रेस ने अपने को विभिन्न राज्यों में फिर से मजबूत के लिए एकला चलो की नीति अपनाई है।






