यह चुनाव आयोग की ओर से शुरू की गई यह मुहिम 4 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म 6, 7, 8 भरवा रहे हैं ताकि मतदाता सूची सटीक हो सके। लेकिन BLOs पर काम का भारी दबाव है, जिससे वे घर-परिवार छोड़कर रात 3 बजे तक काम कर रहे हैं। आइए, इसकी विस्तार से समझें।
लखनऊ में BLOs की खुद की जुबानी दिक्कतें
लखनऊ के BLOs ने खुद अपनी परेशानियां साझा की हैं। मुख्य समस्याएं ये हैं। फॉर्म भरने में अव्यवस्था: मतदाता सूची में नाम न होना, नाम होने पर पता या फोटो गलत होना। पढ़े-लिखे लोग भी फॉर्म में गलतियां कर देते हैं। BLO हबीबा (लखनऊ) ने बताया, “किसी का नाम नहीं है, नाम है तो पता गलत है, फोटो गलत लगी हुई है। लोग फॉर्म भरने में परेशानी झेल रहे हैं।” वे 800 से ज्यादा फॉर्म बांट चुकी हैं, लेकिन लोग फॉर्म लेकर घर चले जाते हैं और जमा नहीं करते, जिससे ऊपर से डांट पड़ती है।
लंबे काम के घंटे: दिन भर घर-घर घूमना, रात में घर पर 1-2 बजे तक एंट्री करना। कुछ BLOs रात 3 बजे तक जागकर काम कर रहे हैं। हबीबा ने कहा, “प्रेशर के कारण रात में भी 1-2 बजे तक काम करना पड़ता है।”
परिवार पर असर: घर-परिवार छोड़कर पूरी तरह ड्यूटी में लगे रहना। कोई मदद नहीं मिलती, सारा काम अकेले करना पड़ता है। BLO शिप्रा मौर्य रोते हुए बोलीं, “लोग फॉर्म जमा नहीं करते, इसे दोनों पक्षों की जिम्मेदारी माना जाना चाहिए।” वे समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रही हैं, लेकिन अधिकारी खुद प्रेशर में हैं।
लंबे काम के घंटे: दिन भर घर-घर घूमना, रात में घर पर 1-2 बजे तक एंट्री करना। कुछ BLOs रात 3 बजे तक जागकर काम कर रहे हैं। हबीबा ने कहा, “प्रेशर के कारण रात में भी 1-2 बजे तक काम करना पड़ता है।”
परिवार पर असर: घर-परिवार छोड़कर पूरी तरह ड्यूटी में लगे रहना। कोई मदद नहीं मिलती, सारा काम अकेले करना पड़ता है। BLO शिप्रा मौर्य रोते हुए बोलीं, “लोग फॉर्म जमा नहीं करते, इसे दोनों पक्षों की जिम्मेदारी माना जाना चाहिए।” वे समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रही हैं, लेकिन अधिकारी खुद प्रेशर में हैं।
देशभर में BLOs पर दबाव: मौतें और तकनीकी दिक्कतें
यह समस्या सिर्फ UP तक सीमित नहीं। पूरे देश में SIR के दौरान BLOs पर भारी बोझ है । मौतों का सिलसिला: 22 दिनों में 7 राज्यों (UP, MP, WB आदि) में 25 BLOs की मौत हो चुकी है। UP में एक BLO की शादी से ठीक पहले मौत हो गई। MP में BLO देवीलाल रैकवार हार्ट पेशेंट होने के बावजूद ऑटो चलाकर काम कर रहे हैं।
तकनीकी और अन्य चुनौतियां: फॉर्म भरने में ऐप/ऑनलाइन सिस्टम की दिक्कतें, अधिकारियों का दबाव, जनता की अनिच्छा। केरल से बंगाल तक BLOs 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं, 5 किमी पैदल चलना पड़ता है। कुछ जगहों पर राजनीतिक दबाव भी, जैसे फॉर्म में जाति नाम काटना। राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस ने चुनाव आयोग से न्यायिक जांच की मांग की है। 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 5 लाख से ज्यादा BLOs 51 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचे हैं।
तकनीकी और अन्य चुनौतियां: फॉर्म भरने में ऐप/ऑनलाइन सिस्टम की दिक्कतें, अधिकारियों का दबाव, जनता की अनिच्छा। केरल से बंगाल तक BLOs 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं, 5 किमी पैदल चलना पड़ता है। कुछ जगहों पर राजनीतिक दबाव भी, जैसे फॉर्म में जाति नाम काटना। राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस ने चुनाव आयोग से न्यायिक जांच की मांग की है। 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 5 लाख से ज्यादा BLOs 51 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचे हैं।
क्या हो समाधान?
BLOs की मांग है कि समय सीमा बढ़ाई जाए, तकनीकी सपोर्ट मजबूत हो और जनता को जागरूक किया जाए। चुनाव आयोग ने BLOs को प्रोत्साहन राशि देने की बात कही है, लेकिन जमीन पर हालात कठिन हैं। अगर आप किसी खास राज्य या BLO की कहानी के बारे में और जानना चाहें, तो बताएं!








