पर्यावरणीय संरक्षण आज की जरूरत है : प्रो. बलराम पाणी

हिमालय पर्यावरणीय धरोहर : प्रो. विंध्यवासिनी पांडेय

 

श्यामलाल कॉलेज (सांध्य), दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग और हिमालय अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्त्वावधान में पर्यावरण एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिल्ली विश्वविद्यालय के हिमालय अध्ययन केंद्र और श्यामलाल कॉलेज (सांध्य) के मध्य शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के साथ पर्यावरण एवं हिमालय अध्ययन से संबंधित विषयों पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य प्रो.नचिकेता सिंह ने स्वागत वक्तव्य में सभी का स्वागत करते हुए पर्यावरण संरक्षण, हिमालय क्षेत्र के अध्ययन और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने ऐसे आयोजनों की सार्थकता को बताते हुए आगे कहा कि पर्यावरण अध्ययन एवं हिमालयी शोध के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने की जरूरत है।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो.बलराम पाणी ने अपने संबोधन में पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, हिमालयी पारिस्थितिकी तथा उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने यह भी बताया कि शैक्षणिक साझेदारी से शोध को नई दिशा मिलेगी और छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि हिमालय अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. विंध्यवासिनी पांडेय ने हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और पर्यावरणीय जटिलताओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने छात्रों को यह समझाया कि हिमालय न केवल प्राकृतिक संसाधनों का प्रमुख स्रोत है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर भी है। उन्होंने इस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग को भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी और आवश्यक बताया।

 

प्रो.आदित्य प्रकाश त्रिपाठी ने

 

MOU हस्ताक्षर समारोह कार्यक्रम के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे दोनों संस्थानों में संयुक्त शोध कार्य, छात्र–विनिमय कार्यक्रम, फील्ड विज़िट एवं पर्यावरण अध्ययन से जुड़े अन्य शैक्षणिक आयामों को बढ़ावा देने पर बल मिलेगा।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो.कुमार प्रशांत ने पर्यावरणीय चिंता की तरफ सबका ध्यान खींचा। कार्यक्रम का संचालन डॉ.सुमन रानी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार ने दिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सभी विभागों के शिक्षकों,नॉन टीचिंग स्टाफ और छात्र–छात्राओं की उपस्थिति रही।

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