National Herald: क्या है नेशनल हेराल्ड केस जिसने राहुल–सोनिया को लपेटा

National Herald

National Herald: ED देश का कोई विभाग काम कर रहा हो या नहीं लेकिन प्रवर्तन निर्देशालय अपना काम जोरो शोरो से कर रहा, ED वह निदेशालय है जिनका केवल विपक्ष पार्टी के नेताओं के घर आना जाना लगा रहता है, और क्लीन चिट सत्ता पक्ष के नेताओं के लिए जारी करने का कार्य करती हैं। इन दिनों दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री की गिरफ्तारी हुई ही थी अब National Herald मामले में ED ने कांग्रेस को भी लपेट लिया हैं।

कल ED (Enforcement Directorate) ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी को नोटिस भेजा। जिसकी जानकारी कांग्रेस के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला और अभिषेक मनु सिंघवी भी मौजूद थे उन्होंने बताया कि 8 जून को सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बुलाया हैं, सोनिया गांधी 8 जून को उपस्थित रहेंगी लेकिन राहुल गांधी फिलहाल देश के बाहर है अगर वे समय पर वापस नहीं आ पाए तो हम ED से National Herald केस के लिए और समय मागेंगे।

कांग्रेस नेताओं ने बिना डरे सामना करने की बात भी की और प्रधानमंत्री मोदी पर इल कार्यवाही का आरोप लगाया ।

क्या हैं National Herald Case 

इस केस (National Herald Case) के तार जवाहरलाल नेहरू से भी जुड़े हैं जब साल 1937 में पहली बार उन्होने ‘एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड’ AJL की नींव रखी, इसने कुल 3 अखबार चलाए जो कि हिन्दी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज और अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड (National Herald) थे। इसकी नींव तो नेहरू ने रखी लेकिन उनके पास कभी इसका मालिकाना हक नही था, इस Association को 5000 सैनिक मिल कर चलाते थे। इनमें कई नेता भी शामिल रहें क्योकि वही इतने सक्षम थे।

National Herald, Enforcement Directorate, National Herald Case

 देश को स्वतंत्रता मिली लेकिन इसके बाद भी नेशनल हेराल्ड (National Herald) चलता रहा। इसके बाद साल 2008 आया अखबार के लगातार घाटे में रहने के कारण इसे बंद करने की सोची गई लेकिन नेशनल हेराल्ड (National Herald) 80 करोड़ के घाटे में चल रहा था।

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इस नुकसान से बचने के लिए राहुल गांधी ने एक कंपनी ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ (Young India private limited) बनाई जिसमें 76 फीसदी के हकदार राहुल और सोनिया खुद थे और बाकी हिस्से का हकदार कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया था।

इसके बाद की कहानी विवादास्पद हैं, कांग्रेस पार्टी ने Young India private limited को 90 करोड़ रुपय दिए और Young India private limited ने इसी घन का इस्तेमाल कर National Herald को खरीद लिया। इस प्रकार घर की कंपनी ने घर की कंपनी खरीद ली लेकिन इसमें एक कानूनी पेंच हैं।

कैसे आया मामला सामने ?

साल 2012 में BJP के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले (National Herald Case) को सबके सामने लाया। उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने गैरकानूनी तरीके से Young India private limited का उपयोग कर National Herald को हथिया लिया हैं।

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सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में कहा कि ये सारा हेर फेर Young India private limited की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए भी किया जा रहा हैं और इसके साथ मात्र 50 लाख खर्च कर 90 करोड़ के घाटे को गलत तरीके से सेटल किया गया। स्वामी ने यह भी बताया कि कोई भी राजनीतिक दल किसी थर्ड पार्टी से इस प्रकार से लेन-देन नहीं कर सकती हैं।

फिलहाल इस मामले से संबंधित सभी नेताओं के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। ईडी (Enforcement Directorate) ने हाल ही में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल से इसी मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ की थी

क्या है कांग्रेस का पक्ष –

कांग्रेस के नेताओं ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत में दलील दी कि ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की संस्था को ‘सामजिक कार्यों’ के लिए बनाया गया है और शेयर ट्रांसफर करने में किसी ‘ग़ैर क़ानूनी’ गतिविधि नही हुई है यग केवल शेयर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया हैं।

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इस केस में हाई कोर्ट ने कहा कि  ‘सबसे पुराने राष्ट्रीय दल की साख दांव पर’ लगी है क्योंकि पार्टी के नेताओं के पास ही नई कंपनी के शेयर हैं’

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 देखना होगा कि सबसे पुरानी पार्टी और देश का इकलौता विपक्ष कांग्रेस पार्टी किस प्रकार से इससे छुटकारा मिलेगा पहले से ही कांग्रेस 5 राज्यों में अपना जमीन खो चुकी है अब इस केस (National Herald) के आने के बाद जनता के बीच किस प्रकार अपना भरोसा बना पाएगी।

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