दिल्ली सीजेपी आंदोलन ने बनाई विशेष पहचान!

खाना-पानी की व्यवस्था के साथ ही व्यवस्थित रूप से हो रहा सरकार का विरोध

जल्द ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे  की हो सकती है घोषणा !

चरण सिंह 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन में एक बात विशेष रूप से देखी जा रही है कि आंदोलनकारियों का ख्याल रखा जा रहा है। खाने और पानी की व्यवस्था दुरुस्त रूप से है। पुलिस की जगह भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी खुद आंदोलनकारियों ने संभाल रखी है। जगह जगह पंखे झलते हुए युवा देखे जा रहे हैं।

आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि छेड़छाड़ की एक भी खबर सामने नहीं आई है। एक लाख की गैदरिंग होने के बावजूद कोई तोड़फोड़ नहीं। पुलिस पर ट्रकों में पत्थर भरकर लाने का आरोप भी लगा। पुलिस ने लाठीचार्ज किया पत्थर भी फेंके पर छात्र हैं कि डटे रहे। वह तो बाहर से छात्र ही थे नहीं तो 20 तारीख की रात को आंदोलन खत्म ही हो गया था।

अब जंतर मंतर पर व्यवस्थित रूप से आंदोलन चल रहा है। हां जो आईसा इस आंदोलन की रीढ़ थी वह आंदोलन में नजर नहीं आ रहा है। आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा आंदोलन में नहीं दिखाई दे रही हैं। विजेता दहिया को सीजेपी से निकाल दिया गया है। अभिजीत टीम ने जो जेपी नड्डा से मिलकर गलती की थी उसे अब सुधार लिया गया है। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने
बाकायदा बयान जारी कर कहा है कि जेपी नड्डा ने गलत जानकारी दी कि हमारी ओर से प्रस्ताव भेजा गया था ऐसा नहीं था। हमारे साथ धोखा हुआ है। अब हम किस के घर नहीं जाएंगे। या तो जंतर मंतर पर बात होगी या फिर कहीं ओर। प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी के पीएम मोदी के आवास के घेराव के बाद आंदोलन को मजबूती मिली है। अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी राहुल गांधी युवाओं के आंदोलन को समर्थन दिया है।
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