शक्‍सगाम घाटी को पाक‍िस्तान ने चीन को कैसे ग‍िफ्ट कर दिया?

शक्‍सगाम घाटी (Shaksgam Valley) का मुद्दा भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच एक लंबे समय से विवादित विषय है। यह घाटी जम्मू-कश्मीर के हिस्से के रूप में भारत द्वारा दावा की जाती है, लेकिन 1963 में पाकिस्तान ने इसे चीन को सौंप दिया। नेहरू की आपत्ति के बावजूद यह कैसे हुआ ?

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया, जिसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) कहा जाता है। शक्‍सगाम घाटी भी इसी क्षेत्र में आती है, जो उत्तरी भाग में स्थित है और कराकोरम पर्वत श्रृंखला के पास है। भारत इसे अपना अभिन्न अंग मानता है, लेकिन उस समय पाकिस्तान का प्रशासनिक नियंत्रण था।

1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, चीन और पाकिस्तान के बीच संबंध मजबूत हुए। दोनों देशों ने अपनी सीमा को परिभाषित करने के लिए बातचीत शुरू की। 2 मार्च 1963 को, पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और चीन के विदेश मंत्री चेन यी ने बीजिंग में ‘चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते’ (Sino-Pakistan Agreement) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्‍सगाम घाटी के लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को चीन को सौंप दिया। बदले में, दोनों देशों ने कुछ छोटे क्षेत्रों का आदान-प्रदान किया, लेकिन मुख्य रूप से यह पाकिस्तान द्वारा चीन को ‘उपहार’ के रूप में देखा जाता है, क्योंकि पाकिस्तान ने भारत द्वारा दावा किए गए क्षेत्र को चीन को दे दिया। यह समझौता पाकिस्तान के लिए रणनीतिक था, क्योंकि इससे चीन के साथ दोस्ती मजबूत हुई और भारत के खिलाफ एक साझेदार मिला। चीन को भी इस क्षेत्र से कराकोरम हाईवे बनाने में मदद मिली, जो बाद में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का हिस्सा बना।

 

नेहरू की आपत्ति

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस समझौते पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने संसद में 5 मार्च 1963 को कहा कि पाकिस्तान को इस क्षेत्र को सौंपने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह भारत का क्षेत्र है। नेहरू ने इसे कश्मीर वार्ता को प्रभावित करने की साजिश बताया और कहा कि यह समझौता भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत को नुकसान पहुंचाने के लिए समयबद्ध तरीके से किया गया है। भारत ने चीन और पाकिस्तान दोनों को औपचारिक विरोध दर्ज कराया।नेहरू की आपत्ति के बावजूद यह कैसे हुआ?

  • Related Posts

    ‘भारत मुश्किल में…’, ईरान वॉर पर US एक्सपर्ट ने नई दिल्ली को किया आगाह!
    • TN15TN15
    • March 12, 2026

    US जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट माइकल कुगेलमैन (अटलांटिक काउंसिल के…

    Continue reading
    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!
    • TN15TN15
    • March 12, 2026

    भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ़…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    ‘भारत मुश्किल में…’, ईरान वॉर पर US एक्सपर्ट ने नई दिल्ली को किया आगाह!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    ‘भारत मुश्किल में…’, ईरान वॉर पर US एक्सपर्ट ने नई दिल्ली को किया आगाह!

    कहानी: “नीलो – सत्ता को चुनौती की कीमत “

    • By TN15
    • March 12, 2026
    कहानी: “नीलो – सत्ता को चुनौती की कीमत “

    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!

    ना गैस, ना चूल्हा-इंडक्शन पर फूली-फूली, रुई जैसी नरम रोटी बनाएं!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    ना गैस, ना चूल्हा-इंडक्शन पर फूली-फूली, रुई जैसी नरम रोटी बनाएं!

    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज

    • By TN15
    • March 12, 2026
    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज

    विनाश की नींव पर खड़ी…

    • By TN15
    • March 12, 2026
    विनाश की नींव पर खड़ी…