पाकिस्तान में हाल के दिनों में तेजरेक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) नामक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर गाजा शांति योजना को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ समर्थन देने के आरोपों के खिलाफ हैं, जिसे टीएलपी ने इस्लाम और फिलिस्तीन के प्रति “विश्वासघात” करार दिया है।
प्रदर्शनकारियों ने लाहौर, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, मुरिडके और वेहारी जैसे कई शहरों में सड़कों पर अवरोध पैदा किए, पुलिस और रेंजर्स के साथ झड़पें हुईं। रविवार रात मुरिडके में हिंसा भड़क उठी, जहां प्रदर्शनकारी इस्लामाबाद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने कंटेनरों से रास्ते अवरुद्ध कर दिए। इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने बसों में आग लगा दी, तोड़फोड़ की और पुलिस पर पथराव किया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बसें जलती हुईं दिख रही हैं, गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही हैं, और बीच सड़क पर एक प्रदर्शनकारी “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाते हुए नाचता नजर आ रहा है। यह वीडियो प्रदर्शन की अराजकता को दर्शाता है।
हिंसा में कम से कम 11 टीएलपी कार्यकर्ता मारे गए हैं, जबकि कई घायल हुए हैं। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं। टीएलपी, जो 2015 में बरेलवी मौलाना खादिम हुसैन रिजवी द्वारा स्थापित हुई, ईशनिंदा कानूनों में बदलाव का विरोध करती रही है और पश्चिमी व इजरायली नीतियों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन कर चुकी है।






