ट्रंप के चीन पर 100% टैरिफ: GTRI की सलाह – अमेरिका पर न भरोसा, खुद पर जोर दें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीन के आयात पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे कुल शुल्क लगभग 130% तक पहुंच जाएगा। यह कदम 1 नवंबर 2025 से लागू होगा और यह 2018 की व्यापार युद्ध के बाद अमेरिका-चीन तनाव की सबसे बड़ी वृद्धि है। ट्रंप का यह फैसला चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ मिनरल्स) के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाने के जवाब में आया है, जो अमेरिका के रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस संदर्भ में ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट (GTRI) ने एक ताजा रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत को अमेरिका के साथ सतर्क रहते हुए आत्मनिर्भरता पर फोकस करने की सलाह दी गई है। GTRI का मुख्य संदेश है: ‘अमेरिका नहीं, खुद पर भरोसा करे भारत’। रिपोर्ट के अनुसार, ये टैरिफ इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टरबाइनों और सेमीकंडक्टर पार्ट्स की कीमतें बढ़ाएंगे और वैश्विक सप्लाई चेन पर गहरा असर डालेंगे। अमेरिका अपने मिनरल सप्लाई को ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और कनाडा जैसे देशों की ओर मोड़ने की कोशिश करेगा, जबकि चीन गैर-पश्चिमी सहयोगियों के साथ वैकल्पिक नेटवर्क मजबूत करेगा। GTRI का मानना है कि दुर्लभ खनिजों की अहमियत के कारण अमेरिका को जल्द ही चीन से नई डील करनी पड़ सकती है, क्योंकि अमेरिका अक्सर आर्थिक परिणामों को नजरअंदाज कर कदम उठाता है, जबकि चीन रणनीतिक रूप से सोचता है।

 

आत्मनिर्भरता विकसित करें

 

महत्वपूर्ण तकनीकों और दुर्लभ खनिजों में स्वावलंबन पर फोकस करें, ताकि भविष्य के व्यापारिक झटकों से अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे। अमेरिका के बदलते वादों पर भरोसा न करें।बराबरी पर समझौतेअमेरिका के साथ कोई भी व्यापारिक डील ‘बराबरी के आधार’ पर करें और इसे अंतिम न मानें। पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करें, लेकिन रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करें।संतुलित वैश्विक संबंधपश्चिमी देशों और BRICS जैसे समूहों दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाएं, ताकि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभा सके।सावधानी बरतेंअमेरिका सहयोगियों से समर्थन मांग सकता है, लेकिन कोई देश चीन के दुर्लभ खनिजों का तुरंत विकल्प नहीं बन सकता। इसलिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए।
GTRI की यह रिपोर्ट भारत को अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच अवसरों का फायदा उठाने, लेकिन जोखिमों से बचने की चेतावनी देती है। भारत पहले से ही अमेरिका को 86 अरब डॉलर का निर्यात करता है, और ये टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में आत्मनिर्भरता ही कुंजी है।

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