वाह रे देश के कर्णधारों, अब सत्ता की अराजकता नहीं बल्कि विपक्ष की आवाज लोकतंत्र के लिए खतरा बनने लगी!

चरण सिंह 
हम तो यह कहते हैं कि विपक्ष कमजोर है इसलिए सरकार की मनमानी बढ़ रही है। कुछ पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, जजों और सेनाधिकारियों ने तो गजब ही कर दिया। इनकी नजरों में सत्ता की मनमानी नहीं बल्कि विपक्ष की आवाज लोकतंत्र के लिए खतरा बन रही है। इन लोगों को आपत्ति है कि चुनाव आयोग पर विपक्ष हमलावर क्यों है ?
विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठा रहा है तो तो कुछ पूर्व जजों, ब्यूरोक्रेट्स और सेनाधिकारियों को दिक्कत हो रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त गृह मंत्री के पैरों में पड़ने लगें फिर भी उन पर उंगली न उठे। मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकतर रिश्तेदार लाभ के पद पर रहें फिर भी उनकी छवि साफ़ सुथरी है ?  विपक्ष कितनी भी शिकायत चुनाव आयोग से कर ले पर कोई कार्रवाई न हो फिर भी उनकी निष्पक्षता कोई सवाल नहीं होने चाहिए ?
बिहार में विधानसभा चुनाव में चुनाव आयुक्त के दिए आंकड़े से तीन लाख वोट अधिक पड़ जाएं  फिर भी चुनाव निष्पक्ष हुए हैं ? मतलब चुनाव आयोग के खिलाफ मत बोलो। बोलोगे तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। जिस विचारधारा का लोकतंत्र में विश्वास ही नहीं रहा। वह हिन्दू राष्ट्र पर जोर देती रही। हिन्दू राष्ट्र उसका एजेंडा रहा। एक धर्म विशेष की बात कर वह सत्ता हासिल करती रही। आजादी की लड़ाई से दूरी बनाकर चलती रही वह लोकतंत्र की हितैषी है। उस विचारधारा की सत्ता के खिलाफ कोई आवाज उठे तो लोकतंत्र के लिए खतरा होने लगा।
मैं राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्ष में बैठे दूसरे दलों का कोई पैरोकार नहीं हूं पर मैं विपक्ष की आवाज का पैरोकार हूं। एक पत्रकार और जागरूक नागरिक होने के नाते सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना अपना कर्तव्य मानता हूँ। इसलिए खुद भी अपनी आवाज को विपक्ष की आवाज मानता हूं। मेरा मानना है कि लोकतंत्र को विपक्ष की आवाज से नहीं बल्कि सत्ता की अराजकता से खतरा है। विपक्ष की आवाज शांत होने से खतरा है। वैसे भी समाजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया कहा करते थे कि जब सड़कें शांत हो जाती हैं तो संसद आवारा हो जाती है। और ये महान लोग सड़कों पर उठने वाली आवाज को लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं। क्या विपक्ष सरकार और दूसरी एजेंसियों के खिलाफ बोलना बंद कर दे ?
इससे मैं भी सहमत हूं कि विपक्ष जनहित में कोई बड़ा आंदोलन नहीं कर पा रहा है। जनता के लिए एकजुट नहीं हो पा रहा है। सत्ता के लिए तड़प रहा है। जेल जाने और डंडे खाने से डर रहा है। पत्रकार वार्ता और पोस्टों तक सिमट कर रहा गया है। सत्ता में स्थापित अधिकतर नेता चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। संघर्ष की भावना इन नेताओं में कम है। जातीय आंकड़ों पर चुनाव जीतने की फ़िराक में ये लोग रहते हैं। सरकार की खामियों को जनता तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। लोगों से संवाद नहीं कर पा रहे हैं तो क्या ये बोलना भी छोड़ दें ? अब एसआइआर ही देख लीजिये। एसआईआर के दबाव में कई बीएलओ ने आत्महत्या कर ली है। ऐसा तो कभी नहीं हुआ। तब भी चुनाव आयोग के खिलाफ कुछ न बोला जाए ?
गजब है कि इन महान लोगों ने राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्ष के दूसरे दलों के खिलाफ एक खुली चिट्ठी लिख दी गई है। चिट्ठी भी 272 प्रमुख लोगों ने लिखी है। इनका कहना है कि राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्ष के दूसरे नेता चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे हैं। चिट्ठी लिखने वाले कौन लोग हैं ? वह पूर्व ब्यूरोक्रेट्स जिनके पास अथाह संपत्ति है। यदि इनकी सम्पत्ति की जांच हो जाये तो पता चल जाएगा कि ये लोग कितने बड़े देशभक्त हैं। वे पूर्व जज जिनके फैसलों पर लगातार उंगली उठ रही है। पैसा इन लोगों के पास भी अथाह होगा।
इस चिट्ठी में कई उन पूर्व सेना अधिकारियों के नाम भी बताए जा रहे हैं जो अग्निवीर योजना का विरोध न कर सके। खुद तो पेंशन ले रहे होंगे पर आज का युवा बिना किसी सुरक्षा के लिए चार साल में सेना से रिटायरमेंट ले ले। उसे पेंशन भी न मिले। लड़ते लड़ते मर जाए और शहीद का दर्जा भी न मिले। वाह री देशभक्ति, लोग विपक्ष की आवाज को लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं।  यह तो गजब हो गया कि अब सत्ता की अराजकता से नहीं बल्कि विपक्ष की आवाज से लोकतंत्र को खतरा होने लगा।
दरअसल बुधवार को एक खुली चिट्ठी में देश के 272 प्रमुख हस्तियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग (EC) की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है। इन हस्तियों ने कहा है कि बिना किसी ठोस सबूत के ‘वोट चोरी’ जैसे गंभीर आरोप लगाकर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। लोकतंत्र के लिए खतरा सत्ता से तो सुना था पर विपक्ष से लोकतंत्र को खतरा होने लगा यह तो पहली बार सुना जा रहा है।

चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में 16 पूर्व जज हैं। 123 सेवानिवृत्त नौकरशाह हैं। 14 पूर्व राजदूत हैं। 133 पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। लोकतंत्र पर खतरा: भारत का लोकतंत्र ‘जहरीली राजनीतिक बयानबाजी’ से जूझ रहा है, जहां विपक्ष EC पर बिना औपचारिक शिकायत या हलफनामे के हमला कर रहा है।

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