राम मंदिर में चंदा चोरी के जिम्मेदार यदि महासचिव चंपत राय और विशेष सदस्य अनिल मिश्रा हैं तो अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी और व्यवस्थापक गोपाल राव क्यों नहीं ? जब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विशेष सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा हो सकता है तो फिर कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी और व्यवस्थापक गोपाल राव का इस्तीफा क्यों नहीं ? किसी भी संगठन में सबसे बड़ी जिम्मेदारी अध्यक्ष की होती है। यदि संगठन की सफलता का श्रेय अध्यक्ष लेता यह तो फिर असफलता और अनियमितता की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी अध्यक्ष की ही होती है। यदि राम मंदिर में चंदा चोरी हुई है तो फिर अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और व्यवस्थापक को क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है ?
दरअसल अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही उनका श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के साथ भी अब किसी तरह का संबंध नहीं रहा हैं। मंगलवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने साफ कर दिया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को सिर्फ उनके दायित्वों से ही नहीं बल्कि ट्रस्ट की सदस्यता से भी हटा दिया गया है।
गोविंद देव गिरि के इस बयान के बाद उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया है, जिसमें ये दावा किया जा रहा था कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को केवल उनके पदों से मुक्त किया गया है लेकिन, वो अब भी ट्रस्ट के सदस्य बने हुए हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने कहा कि उनके इस्तीफे के बाद अब उनका श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से भी कोई संबंध नहीं है। उनकी सदस्यता भी खत्म हो गई है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ट्रस्ट में नहीं
इस मामले में कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे थे लेकिन, गोविंद गिरि ने तमाम आरोपों से ख़ुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि जितना धन मंदिर के कोष में जमा हुआ या खर्च हुआ उनकी जिम्मेदारी सिर्फ उसी तक सीमित थी. लेकिन, जो पैसे बैंक खाते में जमा ही नहीं हुआ उसकी निगरानी और गणना कराने का काम ट्रस्टियों का था. वो पुणे में रहते हैं और धन को लेन-देन रोजाना होता था. इसलिए बैंक में उनके हस्ताक्षर भी मान्य नहीं है।
चंपत राय पर लगे आरोपों का बचाव








