कुंडली मिलान करके शादी करने के बाद भी क्यों टूटती है शादियां ? 

कृष्णा नारायण  
भारतीय परम्परा में षोडश संस्कारों में विवाह एक महत्त्वपूर्ण संस्कार है |प्रत्येक माता पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं |जीवन के नए अध्याय में बच्चों का प्रवेश सुख से भरा हो इसके लिए अपनी तरफ से हर एक प्रयास करते हैं | इसी क्रम में वे कुंडली मिलान करवाते हैं |लड़का एवं लड़की की कुंडली मिलकर ये देखना चाहते हैं की ये दोनों संभावित वर ,वधु जब दांपत्य के बंधन में बंधेंगे तब क्या ये एक अच्छे पति ,पत्नी बन पाएंगे ,क्या ये माता पिता बनकर जीवन चक्र को संतान के माध्यम से आगे बढ़ा पाएंगे|

कुंडली मिलान के लिए मुख्यतः लोग जिन बातों का विचार करते हैं वे हैं :-

1 -वर्ण मिलान
2 – वश्य मिलान
3 – तारा मिलान
4 – योनि मिलान
5 – राशि मैत्री मिलान
6 – गण मिलान
7 – भकूट मिलान
8 – नाड़ी मिलान

हर एक मिलान के लिए अंक दिए जाते हैं | वर्ण को एक अंक ,वश्य को दो अंक , तारा को तीन अंक ….
इसी तरह बढ़ते बढ़ते नाड़ी को आठ अंक| कुल मिलकर छत्तीस अंक| इनमे से जितना ज्यादा अंक मिले उतना ही बेहतर दांपत्य जीवन रहेगा बच्चों का ऐसा वे सोचते हैं|

इन मिलान को लेकर माता पिता इतने कट्टर होते हैं की कम अंक मिलने पर वे शादी को एकदम से इंकार कर देते हैं| खासकर वे गण ,भकूट मिलान पर बल देते हैं| गण मिलान में नक्षत्रों के वर्गीकरण द्वारा लड़का और लड़की, देव गण ,मनुष्य गण या  राक्षस गण में से किस गण में हैं यह देखा जाता है| राक्षस गण होने पर उसे मान्य नहीं करते हैं |
भकूट मिलान में लड़के और लड़की के राशि में अंतर द्वारा एक दूसरे के साथ का संबंधों की गणना की जाती है| अगर दोनों की राशियाँ एक दूसरे से दो बारह या छह आठ है या नवम पंचम है तो इसे अमान्य कर देते हैं| इन्हे शून्य  अंक दिया जाता है| वर और वधु के जन्म राशि से इसकी गणना की जाती है| अर्थात दोनों की कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति देखी जाती है| अगर वर और वधु की जन्म राशि एक दूसरे से 2 /12, 6 /8 या 5 /9 है तो यह भकूट का निर्माण करनेवाला हो जाता है|

जन्म राशि की 2 /12 स्थिति – यहां  विशेष रूप से यह देखा जाना है की कन्या की जन्म राशि वर के  जन्म राशि से दूसरे स्थान में नहीं होना चाहिए| वर की जन्म राशि कन्या के  जन्म राशि से दूसरे स्थान में है तो कोई दिक्कत नहीं है|

जन्म राशि की 5 /9 स्थिति- कन्या की जन्म राशि, वर के जन्म राशि से पांचवें या नौवें स्थान में नहीं होना चाहिए|

जन्म राशि की 6/8 – इसमें यह ध्यान दिया जाना चाहिए की कन्या और वर के जन्म राशि के स्वामी एक दूसरे के मित्र हैं, एक दूसरे के शत्रु हैं या दोनों के स्वामी एक ही हैं| अगर मित्र हैं या समान ही हैं तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर दोनों एक दूसरे के शत्रु हैं तो सही नहीं है|

इसके अलावा एक बात इसमें और ध्यान देने की होती है – अगर वर और वधु एक ही राशि के हैं तो यह देखना है कि उन दोनों का नक्षत्र एक दूसरे से भिन्न हो|
एक नक्षत्र के चार चरण होते हैं, अगर समान नक्षत्र है तो उनके चरण समान नहीं होने चाहिए| ऐसा देखने के पीछे का तात्पर्य यह होता है कि दोनों की एक दशा नहीं चलनी चाहिए|

नाड़ी मिलान में दोनों की नाड़ी अलग अलग होने चाहिए .एक नाड़ी होने पर स्वस्थ्य संबंधी परेशानी खासकर संतान को लेकर परेशानी आती है .

इसका दूसरा पहलू भी है, वो ये की इनमे से गण ,भकूट आदि नहीं मिल पाने की वजह से तीस तीस चालीस साल के बच्चों की शादी माँ बाप नहीं कर रहे .

. जरूरत है दोनों पहलू पर गौर करने का .

इन सब मिलान के बाद भी शादी टूट जाती है .कारण क्या ??

आइये जाने की इनके अलावा कौन सी बातें हैं जिनको की सुखमय दांपत्य जीवन के लिए बच्चों की कुंडली से देखा जाना चाहिए .

दोनों की कुंडली में इसे भाव मिलान कहा जाता है|

दोनों की कुंडली का सप्तम भाव और सप्तमेश की स्थिति तथा विवाह कारक शुक्र की स्थिति का सूक्ष्म परीक्षण करें| शुभ ग्रहों की दृष्टि, युति जहाँ सुखमय विवाह का धोतक है वहीं अशुभ ग्रहों का प्रभाव अशांति का धोतक  है|
दोनों की कुंडली का पंचम भाव ,पंचमेश और संतान कारक बृहस्पति की स्थिति का सूक्ष्म परीक्षण करें . शादी के बाद संतोत्पत्ति होगी या नहीं ?होगी तो कैसी रहेगी ? संतान पक्ष से सुख या दुःख ,इन सभी की जानकारी यहाँ से होगी .
दोनों की कुंडली का दशम भाव  ,दशमेश का व्यवसाय के दृष्टिकोण से सूक्ष्म परीक्षण करें |
दोनों की कुंडली का द्वितीय भाव का सूक्ष्म परीक्षण करें खासकर लड़की की कुंडली में| पारिवारिक सौहाद्रता के लिए इसे देखें|

दोनों की कुंडली का द्वादश भाव और द्वादशेश की स्थिति का सूक्ष्म परीक्षण करें| कभी कभी हम देखते हैं की पति पत्नी समाज के सामने तो बहुत अच्छे होते हैं पर एक छत के नीचे अजनबियों से रहते हैं| तो दोनों के बीच एक छत के नीचे अजनबियों जैसा संबंध है या दोनों के बीच करीबी है, इसकी जानकारी हमें यहाँ से मिलती है|

इसके अलावा शुक्र और चन्द्रमा का साथ देखें, व्याकुलता देने वाले हैं ये|
इसी तरह शुक्र और शनि का सम्बन्ध आपसी संबंधों में शुष्कता लाने वाला होता है|

इस प्रकार हर एक भाव का एक दूसरे के साथ सम्यक मिलान के साथ साथ अन्य बातों को देखेंगे तो ही सुखी दांपत्य का आशीर्वाद देकर शादी को टूटने से बचा पाएंगे|
[नोट] – कुंडली के प्रत्येक भाव का सूक्ष्मता से आकलन दशा के साथ मिलकर किया जाना चाहिए |
ज्योतिष भविष्य कथन नहीं है बल्कि जीवन के प्रति सम्यक दृष्टिकोण देने वाला शास्त्र है | इसका सही उपयोग करें और स्वस्थ्य दांपत्य जीवन की नींव डालें|
@बी कृष्णा नारायण

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