केके पाठक से भिड़ने वाले कौन हैं वंशीधर बृजवासी? तिरहुत MLC चुनाव में निर्दलीय होकर भी गाड़ दिए झंडे

दीपक कुमार तिवारी

पटना/मुजफ्फरपुर। तिरहुत स्नातक उपचुनाव ने पाटलिपुत्र की नींद उड़ा दी है। प्रथम वरीयता के मतों में सबको पछाड़ने वाले शिक्षक नेता वंशीधर बृजवासी तिरहुत स्नातक उपचुनाव में कामयाबी हासिल की। ये न सिर्फ शिक्षक और संगठन एकता के लिए एक मिसाल हो गया बल्कि ये एक मार्ग भी प्रशस्त कर दिया। निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर बृजवासी ने जीत का परचम लहराया। उन्होंने चौंकाते हुए जेडीयू-आरजेडी और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया। शिक्षक नेता वंशीधर बृजवासी हमेशा शिक्षकों के हित में आवाज उठाते रहे हैं। केके पाठक से उनका टकराव जगजाहिर है।
तिरहुत स्नातक उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वंशीधर बृजवासी ने राजनीतिक पंडितों को चौंकाने का काम किया। जहां इस चुनाव में राजग प्रत्याशी के रूप में अभिषेक झा जनता दल (यू) का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, वहीं महागठबंधन से राजद के सिंबल पर गोपी किशन चुनावी मैदान में थे। अंतिम क्षणों में जन सुराज ने डॉ विनायक गौतम पर पत्ता खेला था। कई शिक्षक नेता, व्यवसायी, इंजीनियर और राजनीतिक क्षेत्र के बागी भी चुनावी रण में उतरे थे लेकिन शिक्षक संघर्ष को लेकर नामचीन बने वंशीधर ने अंतत: सबको पछाड़ते हुए चुनावी रण अपने नाम कर लिया।
तिरहुत स्नातक उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद वंशीधर बृजवासी ने इस जीत को संघर्ष का जीत करार दिया। उन्होंने कहा सरकारी तंत्रों की तानाशाही के खिलाफ संघर्ष, चाहे वह शिक्षक कर रहा हो, पत्रकार कर रहा हो, संविदा कर्मी कर रहा हो या पंचायत में काम कर रहे लोग कर रहे हो। उनकी एकजुटता इस जीत का कारण है और वही नायक भी। उनकी कोशिश रहेगी, उनके इस संघर्ष को मुकाम तक पहुंचने में सहायक बने।
वंशीधर बृजवासी अपने लड़ाकू स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। जब केके पाठक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव थे, तब शिक्षकों के हित के लिए वो उनसे भी टकरा गए थे। जिस वजह से उनको निलंबित कर दिया गया। इसके बावजूद उनके तेवर में कोई कमी नहीं आई। वो लगातार सड़कों पर शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाते रहे, जिसका नतीजा ये रहा कि आज उनको एमएलसी उपचुनाव में भारी जन समर्थन मिला और अंतत: चुनाव जीत गए।
अपनी उम्मीदवारी के दौरान वंशीधर बृजवासी ने कहा था कि सरकार ने शिक्षकों को उनका अधिकार दिलाने के बजाय दमन की राजनीति की है। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों को न आईकार्ड मिला, न उनके अधिकारों की रक्षा हुई। हमारी उम्मीदवारी शिक्षकों और स्नातकों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए हैं।
निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर बृजवासी पेशे से शिक्षक हैं और परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वो लगातार शिक्षकों के हित में आवाज उठाते रहे हैं। इस उपचुनाव में उनको मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर के स्नातक मतदाताओं को भरपूर समर्थन मिला। यही वजह है कि उन्होंने जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हरा दिया।
तिरहुत स्नातक उपचुनाव में जीत का सेहरा पहनने वाले शिक्षक नेता वंशीधर बृजवासी एक प्रतीक बन गए हैं। उनकी जीत से वे तो खुश हैं उनसे कहीं ज्यादा खुश शिक्षक समुदाय है। जिनकी एकता ने तिरहुत स्नातक क्षेत्र से मतदान का स्वरूप बदल दिया। जहां उन्हें विधान परिषद में एक प्रतिनिधि हासिल हुआ है। वहीं, उनकी एकता से मिले परिणामों ने उन्हें ये राह सुझाया है कि आने वाले दिनों में अगर एकजुट रहे तो कई अन्य चुनाव का भी परिणाम बदलने में सफल रहेंगे।

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