जंतर मंतर पर युवाओं के आंदोलन पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता के बाद अमित शाह ने नाराजगी बरत रहे हैं मोदी
अमित शाह की मनमानी और पीएम मोदी के सत्ता का केंद्र अपने तक सीमित रखने से नाराज हैं आरएसएस प्रमुख
जन्मदिन पर मोदी के नितिन नवीन के साथ एक महीने का कार्यक्रम बनाने में न पूछने पर अमित शाह ने बनाई कार्यक्रम से दूरी छेड़ा यूसीसी का राग
मोदी-अमित शाह और मोहन भागवत के आपस में टकराने का फायदा मिल सकता है योगी को
चरण सिंह
भारतीय जनता में जो इस समय चल रहा है। यदि इस माहौल ने रफ्तार पकड़ी तो यूपी के मुख्यमंत्री की लाटरी खुल सकती है। दरअसल नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी सबसे अधिक संकट से गुजर रही है। बीजेपी की दो महाशक्ति आमने सामने आ गई हैं तो बीजेपी के मातृ संगठन आरएसएस के मुखिया इन दोनों महाशक्तियों पर निशाना साध रहे हैं। जी हां बात जरूर अजीब जरूर लगेगी पर यह जमीनी हकीकत है।
दिल्ली जंतर मंतर पर युवाओं के आंदोलन में दिल्ली पुलिस की छात्र छात्राओं पर बरती गई बर्बरता के बाद जिस तरह से सरकार को बैकफुक पर आना पड़ाम सरकार की फजीहत हुई उससे पीएम मोदी अमित शाह से बहुत नाराज हैं। नाराजगी इतनी कि अपने जन्मदिन पर एक महीने का कार्यक्रम राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के के साथ मिलकर बना लिया अमित शाह को पूछा नहीं। यह वजह है कि अमित शाह ने मोदी के जन्मदिन पर एक महीने के सेवा संकल्प अभियान और आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम से दूरी बना ली है। अमित शाह का यूसीसी राग इसी भड़ास का हिस्सा माना जा रहा है।
उधर आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने पीएम मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा है कि “जब व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है और यह मानता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है। हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए तो उसे गलतफहमी हो जाती है। मतलब पीएम मोदी गृह मंत्री अमित शाह से नाराज हैं। मोहन भागवत अमित शाह के साथ ही पीएम मोदी की सत्ता को अपने केंद्र व्यक्तिगत रूप से अपने तक सीमित रखने से बहुत नाराज हैं। ऐसे में यदि यह मामला लम्बा चला तो इन तीनों महारथियों के आपस में टकराने का फायदा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है।
देखने की बात यह कि योगी आदित्यनाथ की राजनीति बहुत हद तक इस बार के विधानसभा चुनाव पर टिकी है। यदि वह यह चुनाव हार जाते हैं तो अमित शाह उनकी राजनीति खत्म कर देंगे। यदि योगी आदित्यनाथ यह चुनाव जीत जाते हैं तो वह न केवल अमित शाह बल्कि पीएम मोदी की राजनीति भी खत्म करने स्थिति में होंगे। बदली परिस्थितियों में आरएसएस का एकतरफा सहयोग योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है।
दरअसल पीएम मोदी के जन्मदिन पर सरकार की ओर से महीने भर के कार्यक्रम से बीजेपी और आरएसएस की बहुत फजीहत हो रही है। देश में यह संदेश जा रहा है कि एक ओर देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर पानी तरह पैसा बहा जा रहा है। ऐसे में आरएसएस अपने को असहज महसूस कर रहा है। यूजीसी नियमों में बदलाव के बाद सवर्ण समाज की नाराजगी अलग से एक बड़ी आफत।
यूजीसी एक्ट से यह संदेश जा रहा है कि यह एक्ट हिन्दुओं को बांटने वाला है और आरएसएस का खेल ही हिंदुत्व पर टिका है। ऐसे में बीजेपी के साथ ही आरएसएस को भी सवर्ण समाज का आक्रोश झेलना पड़ रहा है। यह वजह रही कि यूजीसी एक्ट पर उन्हें जैन मुनि के गुस्से का सामना करना पड़ा और प्रस्ताव ही पास होने और कानून न बनने देने की बात कहनी पड़ी। जबकि यह कानून बन चुका है और सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा रखा है। अब देखना यह है कि तीन महाशक्तियों का यह टकराव बीजेपी को कहां ले जाता है।







