पश्चिम एशिया के संकट के लिए कौन जिम्मेदार ? टालने के लिए मोदी ने क्या किया ? 

चरण सिंह  

 

मोदी सरकार पश्चिम एशिया संकट का रोना तो रो रही है पर प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री यह भी तो बताएं कि इस संकट के लिए कौन जिम्मेदार है और उन्होंने इस संकट को टालने के लिए क्या प्रयास किये ? संकट के जिम्मेदार शासकों को कितना एहसास कराया ? संकट को झेलने के लिए जनता को कितना तैयार किया ? जमीनी हकीकत तो यह है कि जितने जिम्मेदार इस संकट के लिए इजरायल और अमेरिका हैं उससे कहीं कम मोदी सरकार नहीं है। ईरान पर हमले से एक दिन पहले पीएम मोदी इजरायल क्या करने गए थे ? जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो पीएम मोदी ने हमले की निंदा क्यों नहीं की ? एक गर्ल्स स्कूल पर हमला कर छोटी-छोटी बच्चियों को मार डाला गया। मोदी चुप क्यों रहे ?
जब रूस से सस्ता तेल और गैस आ रहा था तो फिर अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद क्यों किया गया ? टैरिफ के रूप में क्यों अमेरिका की दादागिरी झेली गई ? क्यों अमेरिका से कृषि ट्रेड डील की जा रही है ? रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से क्यों अनुमति लेनी पड़ रही है ? जब देश में तेल और गैस का संकट है तो प. बंगाल, तमिलनाडु और असम चुनाव में पानी की तरह तेल बहाया गया ? जब खुद पीएम मोदी विदेशी दौरे पर जाने से मना कर रहे थे फिर ऐसी क्या इमरजेंसी थी कि अगले ही दिन विदेशी दौरे पर चले गए ? यदि देश में संकट है तो फिर रूस से 40 रुपए प्रति लीटर तेल खरीदकर भूटान को 52 रुपए पर क्यों बेचा गया ? भारत के लोगों को क्यों 100 रुपए पर लेने को मजबूर किया गया ?
यदि देश पर संकट है तो फिर नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के खर्चों पर अंकुश क्यों नहीं ? युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें कॉकरोच बताया जाने लगा। पश्चिम एशिया संकट के चलते पीएम मोदी ने अपने खर्चे में कितनी कटौती की ?  जमीनी हकीकत तो यह है कि दुनिया के शासक जनता पर संकट थोप रहे हैं। खुद अय्याशी कर रहे हैं और जनता को प्रवचन दे रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री तो लगातार जनता को संकट में डाल दे रहे हैं। कभी नोटबंदी के नाम पर, कभी कोरोना के नाम पर तो कभी जीएसटी के नाम पर और अब प. एशिया संकट के नाम पर।
विडंबना तो यह है कि हर बार संकट के नाम पर लोगों की आय कम कर दी जा रही है और खर्चे कर अधिक कर दिए जा रहे हैं। यही स्थिति इस बार भी है। अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी है। हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ गई पर लोगों की आय नहीं बढ़ी बल्कि कितनों की घट गई ?  अब और घटने की आशंका हो गई है। ऐसे में अराजकता नहीं बढ़ेगी तो क्या होगा ?  दुनिया में हथियारों की होड़ पर अंकुश लगाने की पैरवी कौन सा देश कर रहा है ? पीएम मोदी बात तो युद्ध नहीं बुद्ध की करते हैं पर उनका आचरण बुद्ध नहीं युद्ध का रहा है। जनता को तो मोदी ने संकट का बोझ झेलने के लिए गधा ही समझ रखा है।
दरअसल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से बोला कि गैस पेट्रोल की बचत करो, सोना कम खरीदो, विदेशी दौरे पर मत जाओ। अब वित्त मंत्री सीतारमण कह रही हैं कि पश्चिम एशिया संकट के चलते आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। मतलब महंगाई और बढ़ेगी। पश्चिम एशिया संकट के चलते जब दुनिया भर के लोग परेशानी में है तो आज की तारीख में पश्चिम एशिया संकट की समीक्षा करना बहुत जरुरी हो गया है। दरअसल पश्चिम एशिया का संकट इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमला करने के बाद आया है। ईरान पर हमला तब किया गया जब समझौते को लेकर वार्ता जारी थी। अमेरिका का कहना है कि ईरान पर यूरेनियम होने के चलते वह परमाणु शक्ति बन सकता है। इसलिए उसके पास यूरेनियम नहीं होना चाहिए। जिस तरह से अमेरिका ने दादागिरी दिखाते हुए वेनेजुएला के प्रधानमंत्री को उठवा लिया ऐसे ही अमेरिका और इजरायल यह सोच रहे थे कि एक दो दिन वे ईरान के खेल भी खत्म कर वहां पर बगावत कराकर क्राउन प्रिंस को बैठा देंगे। वह तो ईरान के शासक मोजतबा खामनेई ने इजराइल और अमेरिका के खेल को बिगाड़ दिया। अमेरिका किसी तरह पीछा छुड़ाना चाहता है। पर किसी तरह से इज्जत बचाने के लिए ईरान से यूरेनियम सौंपने की बात कर रहा है। ईरान का कहना है कि यूरेनियम छीनने के अमेरिका ने सभी प्रयास कर लिए हैं। अब ईरान किसी धमकी में नहीं आने वाला है। शांति समझौता इनकी शर्तों पर होगा। प्रधानमंत्री ने जिस तरह से अमेरिका के आगे घुटने टेके हुए हैं। इस में संकट और अधिक बढ़ने वाला है। देश के सामने जो हालात पैदा कर दिए हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि देश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय है।

 

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