आत्मा शरीर में कहां रहती है?

देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट

 

मुंडकोपनिषद ,कठोपनिषद, ऐतरेय उपनिषद ,अथर्ववेद के आधार पर हमने आत्मा के शरीर में निवास स्थान का निर्धारण किया।
आज हम तैत्तिरीय उपनिषद का उद्धहरण प्रस्तुत करेंगे।
प्रसिद्ध वैदिक विद्वान व्याख्या कार महात्मा नारायण स्वामी द्वारा व्याख्यिय‌ उपनिषद रहस्य एकादशोपनिषद नामक पुस्तक से हम प्रमाण ले रहे हैं।

पृष्ठ संख्या 376।
“हृदय में जो यह आकाश है वह यह पुरुष अर्थात जीवात्मा मननशील ज्योतिर्मय और अमर है। दोनों तालुवों के बीच यह मांस का टुकड़ा स्तन के समान लटकता है वह जीवात्मा का स्थान है ।(अर्थात जब जीवात्मा कंठ में रहती है,तो कंठ में उसका स्थान यह हमारे गले में काग के पास में जो मांस का टुकड़ा लटकता है इसके अंदर निवास करती है। जो इसकी स्वप्न अवस्था में स्थित होती है जैसा कि हम कंठ में आत्मा के स्थित होने की बात पूर्व में पढ़ आए हैं)
जहां बालों की जड़ अलग-अलग होती है वहां वह जीवात्मा सर के कपालों को खोलकर अग्नि में प्रतिष्ठित होता है।”
पृष्ठ संख्या 377 पर देखें।
“सबसे पहली बात यह बताई गई है कि शरीर में जीवात्मा कहां रहता है। उसका निवास स्थान हृदयाकाश बतलाते हुए उसे मननशील ज्योतिर्मय और अमर कहा गया है।
जब-जब शरीर छोड़कर मुक्तावस्था प्राप्त करने के लिए यात्रा करता है तब यह दोनों तालुओं के बीच स्तन के समान लटकते हुए मांस के टुकड़े में आ जाता है।
सुषम्णा नाडी‌ जो शरीर के निचले भाग मूलाधार से प्रारंभ होकर हृदय में होती हुई सर तक चली गई है और सर में उसका अंतिम ऊपरी स्थान ब्रह्मरंध्रचक्र के नाम से प्रसिद्ध है। और उसके लिए कहा जाता है कि मुक्त होकर जीव इस मार्ग से निकला करता है। उसका मार्ग उन्ही उपर्युक्त तालुओं के मध्य होकर है। और वह लटकता हुआ मांस का टुकड़ा ठीक उसके मार्ग में जीव को मुक्ति में जाने के लिए ब्रह्मरंध्र में पहुंचना है। इसलिए उसे शरीर के अपने साधारण निवास स्थान हृदय आकाश को छोड़कर उपरोक्त मांस के टुकड़े में आ जाना पड़ता है। इसलिए उसे इंद्रयोनि जीव का स्थान कहा गया है।
प्रष्ठ संख्या 378
वह मुक्त जीव कपालों को खोलकर जहां बालों का अंत होता है और जो ब्रह्म रंध्र की जगह और सुषम्णा का अंतिम चक्र है , में होता हुआ शरीर से निकल जाता है।
शरीर से जीव निकालकर अग्नि वायु आदित्य में होता हुआ ब्रह्मलोक में पहुंचकर मुक्ति के आनंद का उपभोग करने लगता है (छान्दोग्योपनिषद में जो देवयान का प्रकरण आया है वह भी इसी को लेकर है)
इस मुक्त अवस्था को जहां प्राप्त हुए स्वतंत्रता की पराकाष्ठा हो जाती है ।यहां स्वराज कहा गया है‌। जीवन मुक्त को जो शरीर छोड़कर अग्नि वायु आदि में प्रवेश करना पड़ता है वह साधारण अग्नि वायु आदि नहीं होते ।किंतु उसके लिए उनकी विशेषता यह होती है कि यह सब उस जीव के लिए ब्रह्मरूप ही होते हैं क्योंकि अब उसका लक्ष्य केवल ब्रह्म होता है। अन्य की तो कथा ही क्या ?उसे अपनी भी शुधबुध नहीं रहती!
इस प्रकार मुक्त होने पर जीव समस्त इंद्रिय मन और बुद्धि का मालिक हो जाता है उसका अधिकार होता है ।यदि वह चाहे तो उनसे जिस प्रकार से भी चाहे काम लेवे (शतपथ ब्राह्मण कांड 14)
तब यह जीव ब्रह्म हो जाता है। इस वाक्य के अर्थ अनेक सज्जन खींच तानकर लिया करते हैं।
कोई कहते हैं एक जीव ब्रह्मांश हो गया, हो जाता है। कोई कहते हैं कि जीव ब्रह्म के सदृश हो जाता है इत्यादि।
मैं स्वयं इसमें इतना जोड़ रहा हूं कि
(कोई कहता आत्मा सो परमात्मा।
कोई कहता है अहं ब्रह्मास्मि)
परंतु उपनिषद वाक्य स्पष्ट है कि जीव सच्चिदानंद हो जाता है ।इस वाक्य में जीव का अपनी सत्ता नष्ट करके ब्रह्म होने का भाव लेश मात्र भी नहीं है। जीव जब मुक्ति प्राप्त करके ब्रह्मानंद प्राप्त कर लेता है तब वह सच्चित होते हुए भी सच्चिदानंद हो जाता है। क्रिया स्पष्ट कर रही है कि जीव पहले सच्चिदानंद नहीं था, बल्कि अब(अर्थात मुक्तावस्था में) हुआ है। इसलिए उसे सादि सच्चिदानंद ही कह सकते हैं परंतु ब्रह्म अनादि सच्चिदानंद है। यह अंतर सदैव बाकी रहता है।
भक्ति और प्रेम की पराकाष्ठा यही है कि प्रेमी अपने प्रियतम के प्रेम में इतना लवलीन हो जाए उसे अपनी शुधबुध बाकी ना रहे। अभेद ज्ञान ही ब्रह्मानंद की प्राप्ति है ।इसी के लिए एक कवि ने कहा
है
लवलीन है प्रेम में तेरे ऐसे,
सुख की न सुध हो और दुख का न भान हो।
उसी श्रेष्ठ ब्रह्म के लिए कहा गया है कि उसका शरीर आकाश है। अर्थात वह असीम और सर्वव्यापक है ।वह सत्यात्मा और सत्यस्वरूप है ।प्राण रूपी अपने सत्ता में निमग्न रहता है ।आनंद ही उसका मन है ।शांति ही उसकी संपत्ति है ।ऐसे ब्रह्म की उपासना का उपदेश यद्यपि प्राचीन योग्य नामक शिष्य को आचार्य ने दिया परंतु असल में प्राचीन योग्य के लक्ष्य से यह शिक्षा मनुष्य मात्र को दी गई है।

  • Related Posts

    अभी और कुछ देखना बाकी है, अभी भी है क्या अंधभक्ति ?
    • TN15TN15
    • July 27, 2026

    चरण सिंह     सत्ता में बैठे लोगों…

    Continue reading
    जंतर-मंतर प्रदर्शन: फिलहाल तीन बातें
    • TN15TN15
    • July 25, 2026

    प्रेम सिंह कल एक मित्र ने पूछ लिया…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    बिहार: AK-47 का किसने दिया ऑर्डर, कितनों को लगी गोली?

    • By TN15
    • July 27, 2026
    बिहार: AK-47 का किसने दिया ऑर्डर, कितनों को लगी गोली?

    Reservation Hatao आंदोलन को मैथ्स वाले अभिनय सर का समर्थन है या नहीं?    

    • By TN15
    • July 27, 2026
    Reservation Hatao आंदोलन को मैथ्स वाले अभिनय सर का समर्थन है या नहीं?    

    अभी और कुछ देखना बाकी है, अभी भी है क्या अंधभक्ति ?

    • By TN15
    • July 27, 2026
    अभी और कुछ देखना बाकी है, अभी भी है क्या अंधभक्ति ?

    जंतर मंतर आंदोलन पर पैलेट गन के प्रयोग के जिम्मेदार अमित शाह इस्तीफा दें

    • By TN15
    • July 27, 2026
    जंतर मंतर आंदोलन पर पैलेट गन के प्रयोग के जिम्मेदार अमित शाह इस्तीफा दें

    दिल्ली जंक्शन‌ पर कौन उतरा

    • By TN15
    • July 27, 2026
    दिल्ली जंक्शन‌ पर कौन उतरा

    लिखावट साहित्य – सम्मान से सम्मानित हुए युवा आलोचक नीरज कुमार मिश्र

    • By TN15
    • July 27, 2026
    लिखावट साहित्य – सम्मान से सम्मानित हुए युवा आलोचक नीरज कुमार मिश्र