दरअसल चरण रज के लिए बेकाबू भीड़: सत्संग समाप्त होने के बाद भोले बाबा के काफिले के निकलने के दौरान श्रद्धालु उनकी ‘चरण रज’ (पैरों की धूल) लेने के लिए दौड़े। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बाबा ने श्रद्धालुओं से कहा था कि इस धूल को माथे पर लगाने से समस्याएं खत्म होंगी, जिससे लोग बेकाबू होकर दौड़े।
उम्मीद से ज्यादा भीड़: आयोजकों ने प्रशासन से 80,000 लोगों के लिए अनुमति ली थी, लेकिन अनुमानित 2.5 लाख से अधिक लोग पहुंच गए। इससे भीड़ प्रबंधन असंभव हो गया।
खराब आयोजन और प्रबंधन : आयोजन स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। सत्संग एक खेत में हुआ, जहां हाल की बारिश के कारण कीचड़ और फिसलन थी। खेत में गड्ढे और उतार-चढ़ाव होने से लोग फिसले और एक-दूसरे पर गिरे।
भीड़ को रोकने की कोशिश: भोले बाबा के काफिले को निकालने के लिए आयोजन समिति ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, जिससे दबाव बढ़ा और भगदड़ शुरू हो गई। कुछ आयोजकों ने लाठियों का इस्तेमाल भी किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
प्रशासनिक लापरवाही: न्यायिक आयोग और SIT की रिपोर्ट्स में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को भी जिम्मेदार ठहराया गया। पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं थी, और भीड़ की वास्तविक संख्या का आकलन नहीं किया गया।
भौगोलिक जोखिम: आयोजन स्थल एक खेत में था, जहां कीचड़, फिसलन भरी ढलान, और गड्ढों ने खतरे को बढ़ाया। यह स्थान बड़े आयोजनों के लिए उपयुक्त नहीं था। इस हादसे में 121 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे, और 150 से अधिक लोग घायल हुए। जांच में भोले बाबा को क्लीन चिट दी गई, लेकिन आयोजकों और प्रशासन की लापरवाही को मुख्य कारण माना गया।








